Corn Stalk Jaggery
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    Corn Stalk Jaggery: देश में हर साल लाखों किसान मक्के की फसल काटने के बाद बचे हुए डंठलों को खेत में ही जला देते हैं। यह डंठल उनके लिए बेकार था, बस कुछ हिस्सा जानवरों के चारे के काम आता था और बाकी धुएं में उड़ जाता था। लेकिन कर्नाटका के एक किसान महालिंगप्पा ने इसी बेकार चीज़ में ऐसी संभावना देखी जो किसी और को नहीं दिखी। उन्होंने मक्के के डंठल से गुड़ बना दिया और अब पूरा देश उनकी तारीफ कर रहा है।

    दिमाग में आया गन्ने वाला आइडिया-

    महालिंगप्पा के मन में एक दिन एक सवाल आया — गन्ने का रस निकालकर गुड़ बनता है, तो मक्के के डंठल में भी तो रस होता है! बस फिर क्या था, उन्होंने एक प्रयोग किया। मक्के के डंठलों का रस निकाला और उसी तरह पकाकर गुड़ तैयार किया जैसे गन्ने से बनाया जाता है। गुड़ तैयार हुआ, देखने में भी अच्छा लगा, लेकिन असली इम्तिहान तो लैब में होना था।

    लैब रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया-

    जब महालिंगप्पा ने यह गुड़ लैब टेस्ट के लिए भेजा तो रिपोर्ट देखकर खुद वो भी हैरान रह गए। जाँच में पता चला कि मक्के के डंठल से बने इस गुड़ में पोटैशियम, मोलिब्डेनम, कार्बोहाइड्रेट और सुक्रोज़ की मात्रा गन्ने के गुड़ से कहीं ज़्यादा बेहतर है और सबसे बड़ी खुशखबरी इसमें चीनी यानी शुगर की मात्रा गन्ने के गुड़ से कम है। इसका मतलब यह गुड़ मधुमेह यानी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए भी नुकसानदेह नहीं होगा, जो कि आम गुड़ के बारे में नहीं कहा जा सकता।

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    किसान के लिए दोहरा फायदा-

    महालिंगप्पा की इस खोज से किसानों को दो तरफा फायदा हो सकता है। एक तरफ जो डंठल बेकार जाता था और जलाने से वायु प्रदूषण भी होता था, वो अब कमाई का ज़रिया बन सकता है। दूसरी तरफ एक नया और पोषण से भरपूर उत्पाद बाज़ार में आ सकता है जो सेहत के लिहाज़ से भी बेहतर है। यह सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं है, यह उस सोच की कहानी है जो समस्या में भी संभावना देखती है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।