MEA Response: अमेरिका की राजनीति से जुड़ा एक बयान इन दिनों अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। Donald Trump द्वारा शेयर किए गए एक पोस्ट में भारत और चीन जैसे देशों के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों ने विवाद खड़ा कर दिया। इस पूरे मामले पर Ministry of External Affairs (MEA) ने संतुलित और शांत प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हमने कुछ रिपोर्ट्स देखी हैं, बस इतना ही कहना है।”
क्या है पूरा विवाद-
दरअसल, यह मामला उस पोस्ट से जुड़ा है, जिसे Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया। यह कंटेंट अमेरिकी रेडियो होस्ट Michael के शो से लिया गया था। इस चर्चा में सैवेज ने अमेरिका की जन्मसिद्ध नागरिकता नीति (Birthright Citizenship) की आलोचना करते हुए भारत और चीन जैसे देशों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।
उन्होंने आरोप लगाया, कि कुछ लोग अमेरिका जाकर अपने बच्चों को जन्म दिलाते हैं, जिससे उन्हें नागरिकता मिल जाए और बाद में परिवार को भी वहां बुला लिया जाता है। इसी दौरान उन्होंने कई नस्लीय और अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
VIDEO | On US president Donald Trump's social media post mentioning India and China as 'hellhole', MEA Spokesperson Randhir Jaiswal (@MEAIndia) says, "We have seen some reports. That's where I leave it."
— Press Trust of India (@PTI_News) April 23, 2026
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7)#Delhi pic.twitter.com/I70F7pfCl9
अमेरिका में क्यों गरमाया मुद्दा-
अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता लंबे समय से बहस का विषय रही है। यह अधिकार 14th Amendment के तहत दिया गया है, जिसके अनुसार अमेरिका में जन्म लेने वाला हर बच्चा नागरिक बन जाता है। कुछ लोग इसे संविधान का मजबूत आधार मानते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है, कि आज के दौर में इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है। ट्रंप भी पहले कई बार इस नीति को बदलने या सीमित करने की बात कर चुके हैं, जिससे यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में बार-बार सामने आता रहता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया-
इस बयान पर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अन्य देशों ने भी प्रतिक्रिया दी है। Iran ने सार्वजनिक रूप से इस टिप्पणी की आलोचना करते हुए भारत और चीन को “सभ्यता की जननी” बताया। ईरान के इस बयान को मौजूदा वैश्विक तनाव और अमेरिका के साथ उसके रिश्तों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
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क्या है इसका व्यापक असर-
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि इमिग्रेशन और पहचान जैसे मुद्दे अब सिर्फ राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बहस बन चुके हैं। भारत जैसे देश, जहां से बड़ी संख्या में लोग विदेशों में काम करते हैं, ऐसे मामलों को बेहद संवेदनशीलता से देखते हैं।
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