US Iran Conflict: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps ने 1 अप्रैल से 18 अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। इन कंपनियों में Microsoft, Apple, Google, Intel और Boeing जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
क्यों बढ़ा टकराव का खतरा-
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात पहले से ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। शिपिंग रूट्स पर हमले और तेल सप्लाई में रुकावट की आशंका ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। जानकारों का मानना है, कि यह स्थिति अब एक “high-risk phase” में पहुंच चुकी है।
किन सेक्टर्स पर हो सकता है असर-
ईरान की ओर से साफ संकेत दिया गया है, कि वह उन इंडस्ट्रीज को निशाना बनाएगा, जो अमेरिका और इज़राइल से जुड़ी हैं। इसमें केमिकल, ऑयल, स्टील और एल्युमिनियम जैसे सेक्टर्स शामिल हो सकते हैं। एक वरिष्ठ कमांडर ने दावा किया कि कुछ इंडस्ट्रियल साइट्स, जैसे रिफाइनरी और बड़े कॉम्प्लेक्स, पहले ही हमले की चपेट में आ चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और आगे भी ऐसे ऑपरेशन जारी रहेंगे। यानी आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
अमेरिका की चेतावनी-
इस बीच, अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा है, कि आने वाले दिन इस संघर्ष के लिए “decisive” साबित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि बातचीत जारी है, लेकिन अगर ईरान पीछे नहीं हटता, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए भी तैयार है। उनके बयान से साफ है, कि वॉशिंगटन फिलहाल हर विकल्प खुला रखना चाहता है। खास बात यह है कि हाल ही में दुबई के पास एक ऑयल टैंकर में आग लगने की घटना ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है।
ट्रंप का सख्त संदेश-
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने कहा, कि जिन देशों को तेल की कमी का सामना करना पड़ रहा है, वे या तो अमेरिका से तेल खरीदें या खुद अपनी व्यवस्था करें। उन्होंने अपने सहयोगी देशों, खासकर यूनाइटेड किंगडम, से कहा कि वे अब “हिम्मत दिखाएं” और अपनी सुरक्षा खुद संभालें। ट्रंप के इस बयान से यह संकेत मिल रहा है कि अमेरिका भविष्य में हर स्थिति में सहयोग नहीं करेगा।
दुनिया के लिए बढ़ती चिंता-
मध्य पूर्व में बढ़ता यह तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। खासकर तेल की कीमतों, सप्लाई चेन और ग्लोबल इकॉनमी पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा, क्योंकि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।
ये भी पढ़ें- 102 साल की उम्र, 50 साल से अस्पताल नहीं गईं, जानिए चीन की बुज़ुर्ग महिला की ज़िंदगी का राज़
क्या आगे और बढ़ेगा संकट?
फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। एक तरफ बातचीत जारी है, तो दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी भी चल रही है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह तनाव कम होगा या एक बड़े संघर्ष में बदल जाएगा।
ये भी पढ़ें- Russia 1 अप्रैल से बैन करेगा पेट्रोल एक्सपोर्ट, जानिए कौन से देश होंगे प्रभावित, भारत पर क्या होगा असर?



