Iran America Israel War: ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे, संघर्ष को खत्म करने के लिए तीन कड़ी शर्तें रख दी हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने साफ कह दिया है, कि तेहरान शांति चाहता है, लेकिन जब तक वाशिंगटन और तेल अवीव उनकी मांगें नहीं मानते, तब तक यह जंग खत्म नहीं होगी। पेजेश्कियान ने रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए कहा, कि यह युद्ध इजरायल और अमेरिका ने शुरू किया है और इसे खत्म करने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की है।
ईरान की तीन बड़ी शर्तें-
ईरान ने जो तीन शर्तें रखी हैं, वो बहुत ज़रुरी हैं। पहली ईरान के वैध अधिकारों की मान्यता, दूसरी युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई यानी हर्जाना और तीसरी भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी। पेजेश्कियान ने सीधे शब्दों में कहा, कि बिना इन शर्तों के किसी भी संघर्ष विराम को ईरान स्वीकार नहीं करेगा। तेहरान का मानना है, कि यह लड़ाई उस पर थोपी गई है और अब वो बिना किसी ठोस आश्वासन के पीछे नहीं हटेगा।
जंग हमने नहीं छेड़ी-
ईरान ने बार-बार यह बात दोहराई है, कि इस संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इजरायल ने की है। तेहरान का कहना है, कि उसने सिर्फ अपनी रक्षा की है और अब जब बात शांति की हो रही है, तो एकतरफा समझौता उसे मंजूर नहीं। ईरानी राष्ट्रपति ने रूस और पाकिस्तान से बातचीत के बाद यह बयान दिया।
अंतरराष्ट्रीय गारंटी क्यों जरूरी?
ईरान की तीसरी शर्त सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है। वो सिर्फ युद्धविराम नहीं चाहता, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहता है, कि आगे चलकर फिर से कोई हमला न हो। यानी ईरान चाहता है, कि दुनिया के बड़े देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इसकी लिखित गारंटी दें। यह मांग दरअसल उस गहरे अविश्वास को दर्शाती है, जो ईरान को अमेरिका और इजरायल के प्रति है। तेहरान को डर है, कि बिना पक्की गारंटी के शांति समझौता महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा।
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फिलहाल अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान की इन शर्तों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब पूरी दुनिया मध्य-पूर्व में शांति की उम्मीद लगाए बैठी है। ईरान ने साफ कर दिया है, कि वो बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन झुकने के लिए नहीं। अब देखना यह होगा, कि वाशिंगटन और तेल अवीव इन शर्तों पर क्या रुख अपनाते हैं।
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