Viral Video: हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मिर्जापुर का एक 17 साल का लड़का कुत्ते की तरह भौंकता हुआ नजर आ रहा है। ऐसा कहा जा रहा है, कि 4 महीने पहले उसे कुत्ते ने काट लिया था, जिसकी वजह से उसका यह हाल हुआ है। वीडियो में देखकर लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है, कि क्या यह रेबीज है। क्या कुत्ते का काटना इंसान को सच में कुत्ते जैसा बना सकता है। इन्हीं सवालों का जवाब देने के लिए एम्स नई दिल्ली के प्रशिक्षित न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर राहुल चावला ने 9 अप्रैल को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया और पूरी बात साफ की है।
रेबीज में क्या होता है-
डॉक्टर चावला का कहना है, कि रेबिज से पीड़ित व्यक्ति कुत्ते की तरह भौंकना शुरू नहीं करता उनका कहना है, कि रेबीज दिमाग के ब्रेन स्टेम हिस्से को प्रभावित करता है और इससे गले की मांसपेशियों में तकलीफ और ऐंठन होती है। इसकी वजह से मरीज के लिए पानी का पिना असंभव हो जाता है, जिसे हम हाइड्रोफोबिया यानी पानी के डर के नाम से जानते हैं।
डॉक्टर चावला का कहना है, कि कभी-कभी गले ऐंठन होती है, जिससे अजीब आवाज ज़रूर निकल जाती है। लेकिन वह कुत्ते के भौंकने जैसी बिल्कुल नहीं होती। उन्होंने वायरल वीडियो के बारे में सीधे कहा है, कि उसे बच्चों की हालत रेबिज से मेल नहीं खाती।
फंक्शनल न्यूरोलॉजिस्टिक डिसऑर्डर-
डॉक्टर चावला का कहना है, कि इस तरह के लक्षण फंक्शनल न्यूरोलॉजिस्टिक डिसऑर्डर की वजह से हो सकते हैं, जिसे पहले हिस्टीरिया कहा जाता था, इसके अलावा यह कन्वर्जन या डिसोसिएटिव रिएक्शन भी हो सकता है, जो ज्यादातर डर की वजह से होता है। इस मामले में कुत्ते के काटने का डर ही शायद उसकी जड़ है।
डॉक्टर का कहना है, कि ऐसे मामलों में फॉरेन रेबीज का ठप्पा लगाने की बजाय, सही न्यूरोलॉजिकल और मनोचिकित्सक जांच करनी चाहिए। रिपोर्ट्स की मानें, तो लड़के के माता-पिता ने जब भी इलेक्शन देखे, तो उसे पंडित के पास ले गए और यह मान लिया, कि किसी ने उनके बेटे पर काला जादू किया है।
परिवार ने नहीं कराया सही इलाज-
वहां मौजूद लोगों ने परिवार को समझाया और अस्पताल जाने की सलाह दी। वहीं डॉक्टरों को रेबीज का संदेह हुआ और उसे वाराणसी रेफर किया गया है, जांच में पता चला है, कि लड़के को एंटी रेबीज के दो इंजेक्शन लगे थे, लेकिन परिवार ने तीसरा इंजेक्शन नहीं लगवाया था। जिसकी वजह से पूरा कोर्स अधूरा रह गया।
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डॉक्टर का कहना है, कि पूरे मामले में एक और जरूरी बात यह है. की सेहत से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से फैलती है। इसलिए कोई भी मेडिकल जानकारी शेयर करने से पहले उन्हें जताना जरूरी होता है, बिना सोचे समझे वायरल वीडियो फैलाने से लोगों में डर और भ्रम पैदा होता है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है, किसी भी स्वास्थय समस्या के लिए अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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