Viral Video: मध्य प्रदेश से सामने आया एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें हजारों लीटर दूध को नर्मदा नदी में बहाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो ने देशभर में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, क्या यह आस्था का प्रतीक है या संसाधनों की बर्बादी? जहां एक तरफ भक्त इसे धार्मिक परंपरा का हिस्सा बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोग इसे पर्यावरण और समाज के लिए नुकसानदेह मान रहे हैं।
चैत्र नवरात्रि में हुआ भव्य आयोजन-
जांच में सामने आया, कि यह वीडियो सीहोर जिले के सतदेव गांव स्थित श्री दादाजी दरबार पातालेश्वर महादेव मंदिर का है, जहां चैत्र नवरात्रि के अवसर पर 18 मार्च से 7 अप्रैल तक 21 दिनों का एक विशाल धार्मिक आयोजन किया गया। इस आयोजन में महायज्ञ, शिव महापुराण कथा और 151 भक्तों द्वारा लगातार दुर्गा पाठ जैसे कार्यक्रम शामिल थे। बताया गया, कि करीब 5 एकड़ में पंडाल बनाया गया था, जहां रोज़ हजारों श्रद्धालु शामिल होते थे।
11,000 litres of milk poured in to river Narmada for “ purification “ .
— Prashanth Rangaswamy (@itisprashanth) April 9, 2026
If this is a sane country – criminal cases would have been booked for polluting the river !
But these idiots will be celebrated in the name of Bhakti ! pic.twitter.com/O5zUvoqMYQ
11,000 लीटर दूध का अभिषेक बना चर्चा का केंद्र-
इस पूरे आयोजन के दौरान एक विशेष दिन ऐसा था, जब लगभग 11,000 लीटर दूध नर्मदा नदी में अभिषेक के रूप में अर्पित किया गया। आयोजकों के अनुसार, यह उनकी गहरी आस्था और मां नर्मदा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। श्रद्धालु पवन पवार ने बताया कि “बाबा के लिए नर्मदा जी मां समान हैं। वह नंगे पैर नर्मदा परिक्रमा करते हैं और समाज सेवा में लगे रहते हैं। यह सब जनकल्याण के लिए ही किया गया।”
सोशल मीडिया पर उठे सवाल-
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, वैसे ही लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। कई यूजर्स ने सवाल उठाया, कि जिस राज्य में कुपोषण एक बड़ी समस्या है, वहां इतने बड़े पैमाने पर दूध बहाना क्या सही है? लोगों का कहना है कि यही दूध जरूरतमंद बच्चों को दिया जा सकता था।
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आयोजकों का पक्ष-
विवाद के बीच आयोजन से जुड़े लोग अपनी बात पर कायम हैं। उनका कहना है, कि यह पूरा कार्यक्रम निजी फंड से किया गया और धार्मिक परंपराओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, यह स्थान सप्तऋषियों की तपोभूमि है और यहां भगवान शिव पातालेश्वर महादेव के रूप में प्रकट हुए थे।
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