Viral Video: एक महिला की कहानी ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया है। अंकिता दास ने बताया, कि उनकी साड़ी की वजह से एक स्कूल में टीचिंग जॉब लगभग हाथ से चली गई थी। यह वीडियो वायरल होते ही यह बहस शुरू हो गई कि क्या किसी शिक्षक के कपड़े उनकी काबिलियत से ज्यादा अहम हो सकते हैं।
Demo class में साड़ी का पल्लू बना मुसीबत-
Times Now के मुताबिक, अंकिता दास ने Instagram पर दो वीडियो पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने एक नौकरी के इंटरव्यू का किस्सा सुनाया। वो एक स्कूल में डेमो क्लास देने गई थीं और उन्होंने साड़ी पहनी थी क्योंकि अक्सर यह माना जाता है कि शिक्षकों को इसी तरह के कपड़े पहनने चाहिए। कक्षा में न सिर्फ बच्चे बल्कि एक अन्य शिक्षक और प्रिंसिपल भी मौजूद थे। क्लास अच्छी चल रही थी और बच्चे पढ़ाई में पूरी तरह जुड़े हुए थे। लेकिन बीच क्लास में उस शिक्षक ने अंकिता को बाहर बुलाया और बताया कि प्रिंसिपल ने कहा है कि वो अपना साड़ी का पल्लू ठीक करें।
पल्लू ठीक किया और आत्मविश्वास के साथ पूरी की क्लास-
अंकिता ने बताया, कि पल्लू थोड़ा सरक गया था लेकिन वो इतनी छोटी बात थी जिसे नजरअंदाज किया जा सकता था। फिर भी उन्होंने बिना कुछ कहे पल्लू ठीक किया और वापस क्लास में जाकर अपनी डेमो पूरे आत्मविश्वास के साथ खत्म की। उन्हें लगा था, कि यह बात यहीं खत्म हो जाएगी। लेकिन बाद में जब उन्हें पता चला, कि इवोल्यूशन मीटिंग में उनकी टीचिंग के साथ-साथ इस साड़ी वाले पल को भी चर्चा का विषय बनाया गया, तो वो हैरान रह गईं। उन्होंने कहा, कि उनकी जानकारी और आत्मविश्वास नहीं डगमगाया था, बस साड़ी का पल्लू सरका था और किसी तरह वही पूरी बातचीत का केंद्र बन गया।
साड़ी खूबसूरत है पर हर जगह नहीं-
अंकिता ने एक जरूरी सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा, कि साड़ी बेशक सुंदर होती है लेकिन घंटों खड़े रहकर पढ़ाना, बोर्ड पर लिखना और क्लास संभालना, इन सबके लिए यह हमेशा व्यावहारिक नहीं होती। उन्होंने पूछा कि आखिर शिक्षकों के लिए ये ड्रेस कोड बनाता कौन है और क्यों? जब बाद में लोगों ने पूछा कि नौकरी मिली या नहीं तो अंकिता ने बताया, कि हां, नौकरी मिल गई। लेकिन जब वो स्कूल join करने गईं तो कई स्टाफ सदस्यों ने पहली मुलाकात में ही उनसे साड़ी वाला किस्सा पूछा जो उन्हें काफी शर्मनाक लगा।
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इंटरनेट पर उठी आवाजें कपड़े नहीं काबिलियत देखो-
इस वीडियो ने एक बड़ी बहस छेड़ दी। कई लोगों ने अपने मिलते-जुलते अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा, कि उनकी demo class शानदार रही और बच्चे जुड़े हुए थे लेकिन formal कपड़े न पहनने की बात ज्यादा मायने रखती दिखी। एक दशक से ज्यादा के अनुभव वाले एक वरिष्ठ शिक्षक ने लिखा कि जब तक कपड़े शालीन और उचित हों, शिक्षकों को वही पहनना चाहिए जिसमें वो सहज महसूस करें। यह बहस दरअसल उस पुरानी सोच पर सवाल है जो किसी की काबिलियत को उसके कपड़ों के नजरिए से आंकती है।
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