Arvind Srinivas: तकनीक की दुनिया में एक बड़ी खबर आई है। दरअसल भारतीय मूल के युवा उद्यमी अरविंद श्रीनिवास के नेतृत्व में चलने वाली कंपनी पर्प्लेक्सिटी एआई ने गूगल के क्रोम ब्राउज़र को खरीदने के लिए 34.5 अरब डॉलर की बेतहाशा बड़ी बोली लगाई है। यह प्रस्ताव मंगलवार (15 अगस्त) को अल्फाबेट के मुख्य कार्यकारी सुंदर पिचाई को भेजा गया है। यह घटना उस समय हुई है, जब अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद गूगल पर एकाधिकार तोड़ने का दबाव बढ़ रहा है।
कौन हैं Arvind Srinivas–
अरविंद श्रीनिवास का जन्म 7 जून 1994 को मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था। वे एक प्रतिभाशाली कंप्यूटर वैज्ञानिक और उद्यमी हैं, जो अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्टार्ट-अप पर्प्लेक्सिटी के मुख्य कार्यकारी हैं। उन्होंने आईआईटी मद्रास से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में दोहरी उपाधि (बी.टेक और एम.टेक) हासिल की। बाद में उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की। अपने शैक्षणिक जीवन के दौरान उन्होंने ओपन-एआई, गूगल ब्रेन और अन्य बड़ी कंपनियों में अनुसंधान के पद पर काम किया है।
अरविंद की कहानी हर भारतीय युवा के लिए प्रेरणादायक है। एक साधारण भारतीय परिवार से निकलकर उन्होंने सिलिकॉन वैली में अपनी पहचान बनाई है। 2022 में उन्होंने पर्प्लेक्सिटी एआई की स्थापना की, जो अब 18 अरब डॉलर की कंपनी बन चुकी है। यह सफलता दिखाती है, कि भारतीय मेधा किस तरह विश्व स्तर पर धमाल मचा रही है।
पर्प्लेक्सिटी एआई का दामदार प्रस्ताव-
पर्प्लेक्सिटी एआई, जिसकी स्थापना 2022 में हुई थी, का वर्तमान में 18 अरब डॉलर का मूल्यांकन (कीमत) है। लेकिन कंपनी ने क्रोम को खरीदने के लिए अपने खुद के मूल्यांकन से दोगुनी राशि की पेशकश की है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, कई बड़े निवेशकों और उद्यम पूंजी कोषों ने इस सौदे का पूरा समर्थन करने की सहमति दी है।
कंपनी का मकसद क्रोम के 3 अरब से अधिक यूज़र्स का फायदा उठाकर अपने कृत्रिम एआई बेस्ड सर्च इंजन को मजबूत बनाना है। यह सर्च इंजन गूगल और ओपन-एआई के चैट-जीपीटी जैसे प्रतिस्पर्धियों से सीधी टक्कर ले रहा है।
अमेरिकी सरकार का दबाव और एकाधिकार का मुद्दा-
यह बोली उस समय आई है, जब अमेरिकी न्याय विभाग गूगल पर एकाधिकार तोड़ने के लिए दबाव बना रहा है। 2008 में शुरू हुआ क्रोम ब्राउज़र गूगल को भारी मात्रा में जानकारी प्रदान करता है, जिसका इस्तेमाल वे विज्ञापनों को लक्षित करने के लिए करते हैं। अमेरिकी अदालत ने पाया है, कि गूगल का सर्च में अवैध एकाधिकार है।
न्याय विभाग का कहना है, कि क्रोम को बेचने से सर्च प्रतिस्पर्धियों के लिए अधिक समान स्थिति बनेगी। सितंबर 2025 में इस मामले की सुनवाई होनी है। न्याय विभाग के अनुसार, क्रोम का विभाजन गूगल के इस महत्वपूर्ण सर्च पहुंच बिंदु पर नियंत्रण को स्थायी रूप से रोक देगा और प्रतिद्वंद्वी सर्च इंजनों को उस ब्राउज़र तक पहुंच प्रदान करेगा जो कई उपयोगकर्ताओं के लिए इंटरनेट का प्रवेश द्वार है।
अन्य दावेदार भी हैं मैदान में-
रिपोर्टों के अनुसार, ओपन-एआई, याहू और अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट जैसी अन्य बड़ी कंपनियों ने भी क्रोम में दिलचस्पी दिखाई है। लेकिन पर्प्लेक्सिटी का प्रस्ताव अपने विशाल आकार के लिए अलग है, जो उसके अपने मूल्यांकन से दोगुना है।
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भारतीय प्रतिभा का विश्वव्यापी प्रभाव-
अरविंद श्रीनिवास ने अल्फाबेट के मुख्य कार्यकारी सुंदर पिचाई को लिखे पत्र में कहा है, कि उनका प्रस्ताव “सर्वोच्च सार्वजनिक हित” में है और क्रोम को “सक्षम, स्वतंत्र” हाथों में देने का उद्देश्य है। कंपनी ने वादा किया है, कि वे क्रोमियम जो क्रोम और कई अन्य ब्राउज़रों का मुक्त स्रोत आधार है, को बनाए रखेंगे और गूगल को क्रोम का मूल सर्च इंजन बनाए रखेंगे, जबकि उपयोगकर्ताओं के लिए इसे बदलना आसान बनाएंगे।
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