AI Earnings
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    AI Earnings: दिल्ली के उद्यमी रोहन धवन ने LinkedIn पर एक पोस्ट लिखी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। उन्होंने बताया, कि हाल ही में उनके भतीजे से मुलाकात हुई, जो 24 साल का है और एक YC-backed AI startup में रिमोटली काम करता है। सालाना कमाई है ₹40 लाख। लेकिन घर में खुशी की जगह चिंता है। रात के खाने के बाद भतीजे के पिता ने रोहन को अलग बुलाया और कहा, “रोहन, यह कुछ करता ही नहीं। 2-3 घंटे लैपटॉप खोलता है और बंद कर देता है। कुछ इलिगल तो नहीं कर रहा?”

    समस्या कमाई की नहीं-

    रोहन धवन ने अपनी पोस्ट में बताया, कि अगर यही भतीजा किसी पारंपरिक IT कंपनी में 8-9 घंटे बैठकर आधी तनख्वाह में काम करता तो शायद परिवार को कोई चिंता नहीं होती। लेकिन कम घंटे और ज़्यादा पैसे, यह समीकरण पुरानी पीढ़ी के लिए समझना मुश्किल है। उन्होंने कहा, कि AI की वजह से अब कुछ घंटों का फोकस्ड काम पुराने ज़माने के पूरे दिन के काम से भी ज़्यादा प्रोडक्टिव हो सकता है। और यही बात लोगों को हज़म नहीं हो रही।

    LinkedIn पर दो खेमे हो गए-

    यह पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। एक ने लिखा, “काम तो काम है। पैसे की अपनी कीमत होती है। 24 साल में दिन में 2-3 घंटे काम करना बहुत असामान्य लगता है।” दूसरे ने पलटकर कहा, “अगर एक 24 साल का लड़का 2-3 घंटे में वो कर देता है, जो दूसरे 12 घंटे में करते हैं, तो यह आलस नहीं, यह सफलता है।” एक तीसरे ने बीच का रास्ता निकालते हुए कहा, कि मां-बाप की चिंता समझ में आती है क्योंकि ऑनलाइन कमाई के कुछ तरीके संदिग्ध भी होते हैं और जागरूकता की ज़रूरत है।

    AI ने बदला काम का पूरा नज़रिया

    यह पूरा विवाद दरअसल एक बड़े बदलाव की तरफ इशारा करता है। कई लोगों ने कहा कि हम “time-based” काम की परिभाषा से “output-based” की तरफ बढ़ रहे हैं और यह बदलाव असहज ज़रूर लगता है। पारंपरिक व्यवस्था में मेहनत को घंटों से मापा जाता था, लेकिन AI के दौर में नतीजे मायने रखते हैं। Startups में अक्सर कर्मचारियों को तय घंटों के लिए नहीं, बल्कि specific नतीजों के लिए रखा जाता है। वो कम और इंटेंस घंटों में काम करते हैं और ज़रूरत पड़ने पर उपलब्ध रहते हैं।

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    पुरानी सोच और नई दुनिया का टकराव-

    असली सवाल यह नहीं कि वो लड़का कितने घंटे काम करता है, असली सवाल यह है, कि क्या हम यह स्वीकार करने के लिए तैयार हैं कि काम की दुनिया बदल गई है? जो लोग AI और टेक्नोलॉजी को समझते हैं वो कम वक्त में ज़्यादा कमा सकते हैं। और जो परिवार इसे नहीं समझते उनके लिए यह जादू की तरह लगता है या फिर शक की तरह। इस खाई को भरने के लिए ज़रूरत है, खुले दिल से बातचीत की न कि शक की।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।