Solar Eclipse 2026: इस साल का पहला सूर्य ग्रहण देखने के लिए अब बस कुछ ही दिन बाकी हैं। 17 फरवरी 2025 को होने वाला यह ग्रहण एक खास खगोलीय घटना होगी, जिसे एन्युलर सोलर इक्लिप्स कहा जाता है। इस दौरान आसमान में एक अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा जब सूरज के चारों ओर रोशनी की एक चमकदार रिंग बन जाएगी।
इस अनोखी घटना को ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी आग की अंगूठी के नाम से जाना जाता है। हालांकि यह ग्रहण बेहद कम समय के लिए दिखाई देगा और दुनिया के सिर्फ कुछ खास हिस्सों में ही इसे देखा जा सकेगा।
कितने समय तक रहेगा ग्रहण का असर-
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सूर्य ग्रहण करीब 2 मिनट 20 सेकंड तक रहेगा। ग्रहण की शुरुआत सुबह 07:01 यूटीसी पर होगी, जो भारतीय समय के अनुसार दोपहर 12:31 बजे होगा। यह छोटी सी अवधि इस खगोलीय घटना को और भी खास बना देती है। स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ग्रहण को पूरी तरह से देखने वालों की संख्या बहुत कम होगी, क्योंकि इसका पाथ अंटार्कटिका के एक छोटे से इलाके तक सीमित रहेगा। वहां मौजूद रिसर्च स्टेशनों पर काम करने वाले वैज्ञानिक और कुछ गिने-चुने स्पेस एंथूजियास्ट्स ही इस पूरे नजारे को देख पाएंगे।
कहां-कहां दिखेगा यह खगोलीय करिश्मा-
यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका में दिखाई देगा। इसके अलावा दक्षिणी अर्जेंटीना, चिली, दक्षिण अफ्रीका के कुछ हिस्सों और आसपास के महासागरीय क्षेत्रों में भी इसे देखा जा सकेगा। अंटार्कटिका में लेट सीजन टूर्स पर गए क्रूज शिप्स के यात्री भी इस दुर्लभ घटना के गवाह बन सकते हैं। हालांकि ज्यादातर लोगों को यह ग्रहण पार्शियल फेज में ही दिखाई देगा, जिसमें चांद सूरज के सिर्फ एक हिस्से को ही ढकेगा। पार्शियल इक्लिप्स के दौरान चांद पूरे सूरज को कवर नहीं कर पाता और सूरज का एक भाग दिखाई देता रहता है।
क्यों बनती है आग की अंगूठी-
एन्युलर सोलर इक्लिप्स एक बेहद खूबसूरत और दुर्लभ खगोलीय घटना है। यह तब होती है जब चांद धरती से सबसे दूर की पोजिशन पर होता है। इस स्थिति में चांद का साइज सूरज की तुलना में छोटा दिखाई देता है। जब चांद सूरज के सामने आता है, तो वह उसे पूरी तरह से ढक नहीं पाता। इसी वजह से सूरज के किनारों से रोशनी की एक गोलाकार रिंग बन जाती है जो किसी चमकती हुई आग की अंगूठी जैसी दिखती है। यही वजह है, कि इस खास ग्रहण को ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह नजारा इतना शानदार होता है, कि स्पेस लवर्स इसे देखने के लिए दुनिया के कोने-कोने से सफर करते हैं।
सावधानी है बेहद जरूरी-
एक्सपर्ट्स ने ग्रहण देखते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। द संडे गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार ग्रहण को नंगी आंखों से देखना बेहद खतरनाक हो सकता है क्योंकि इससे आंखों की रोशनी पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए आईएसओ सर्टिफाइड सोलर इक्लिप्स ग्लासेज का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।
चाहे ग्रहण का पार्शियल फेज हो या एन्युलर फेज, दोनों ही स्थितियों में प्रोटेक्टिव ग्लासेज पहनना अनिवार्य है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिना प्रोटेक्शन के सूरज की तरफ देखने से रेटिना को परमानेंट डैमेज हो सकता है। इसलिए अगर आप इस खगोलीय घटना को देखने की प्लानिंग कर रहे हैं तो सबसे पहले सर्टिफाइड ग्लासेज जरूर खरीद लें।
ये भी पढ़ें- चीनी बिजनेसमैन ने बताया India-China के बीच फर्क, वर्क-लाइफ बैलेंस पर कही बात हुई वायरल
भारत में नहीं दिखेगा पूर्ण ग्रहण
यह बात थोड़ी निराशाजनक है, कि भारत में इस ग्रहण को पूरी तरह से नहीं देखा जा सकेगा। ग्रहण का पाथ मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध तक सीमित है। हालांकि स्पेस एंथूजियास्ट्स इसे ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम्स के जरिए देख सकेंगे। कई स्पेस एजेंसीज और साइंस ऑर्गेनाइजेशंस इस दुर्लभ घटना को लाइव ब्रॉडकास्ट करने की तैयारी में हैं। यह साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण है और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक शानदार मौका है, प्रकृति के इस अद्भुत करिश्मे को देखने का।
ये भी पढ़ें- 15 मिनट में टिफिन तैयार! 6 आसान रेसिपी जो बचाएंगी आपका समय और होंगी टेस्टी



