Ghaziabad Suicide Case: गाजियाबाद में पिछले हफ्ते हुई एक दिल दहलाने वाली घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। तीन बहनों ने अपनी रिहायशी बिल्डिंग की नौवीं मंजिल से जान दे दी। इस त्रासदी के बाद गाजियाबाद पुलिस ने उत्तर प्रदेश सरकार को पांच ऑनलाइन गेमिंग एप्लिकेशन पर बैन लगाने की सिफारिश की है।
पुलिस के मुताबिक, लड़कियों ने अपने सुसाइड नोट में इन गेम्स का जिक्र किया था। यह मामला न सिर्फ परिवारों के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर सवाल खड़ा करता है, कि आखिर हमारे बच्चे किस तरह की कंटेंट देख रहे हैं।
रात दो बजे नौवीं मंजिल से कूदीं तीनों बहनें-
द् डेली जागरण के मुताबिक, चार फरवरी की रात करीब दो बजे तीनों बहनें, जिनकी उम्र 11, 14 और 16 साल थी, अपनी बिल्डिंग से कूद गईं। अब तक यह साफ नहीं हो पाया है, कि आखिर इतनी छोटी उम्र में उन्हें ऐसा कदम उठाने की क्या जरूरत पड़ी। जांच में पता चला, कि लड़कियां कोरियन कल्चर, के-ड्रामा और के-पॉप की दीवानी थीं। वे घंटों ऐसे वीडियोज देखती रहती थीं और अपनी फैमिली से ज्यादा कोरियन कंटेंट से जुड़ी हुई थीं। यह बात उनके बर्ताव और डायरी से सामने आई है।
सुसाइड नोट में पांच गेम्स का जिक्र-
पुलिस को लड़कियों के घर से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें पांच ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स का जिक्र किया गया है। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस ट्रांस हिंडन जोन निमिष पाटिल ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, “उनके सुसाइड नोट में पांच ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स का जिक्र है, जिन्हें लड़कियां यूज कर रही थीं। हमने स्टेट अथॉरिटीज को इन ऐप्स पर बैन लगाने के लिए लिखा है। यह सिफारिश आगे राज्य से केंद्र को भेजी जाएगी, जिससे उचित कदम उठाए जा सकें।”
ये हैं वो पांच गेम्स-
गाजियाबाद पुलिस द्वारा नाम लिए गए पांच गेम्स हैं, पॉपी प्लेटाइम, द बेबी इन येलो, एविल नन, आइसक्रीम मैन और आइस गेम। ये सभी गेम्स डार्क और हॉरर कंटेंट से भरे हुए हैं, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है, कि ऐसे गेम्स और कंटेंट बच्चों को रियलिटी से दूर ले जाते हैं और उन्हें मानसिक रूप से परेशान करते हैं।
क्या है फाउल प्ले की आशंका-
इस केस में फाउल प्ले की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं, क्योंकि लड़कियों के पिता की पास्ट हिस्ट्री काफी विवादास्पद रही है। उनकी तीन पत्नियां थीं और एक लिव इन पार्टनर की 2015 में छत से गिरकर मौत हो गई थी। हालांकि अब तक पुलिस को किसी फाउल प्ले का कोई सबूत नहीं मिला है और जांच अभी जारी है।
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डीसीपी ने आगे कहा, “एक टीम लड़कियों के नाना से बयान लेने दिल्ली भी भेजी गई है। अभी तक इस केस में कुछ भी संदिग्ध सामने नहीं आया है और हम इसे सुसाइड केस के तौर पर ट्रीट कर रहे हैं। इस मामले की जांच एसीपी रैंक के अधिकारी द्वारा की जा रही है।”
यह घटना माता पिता और समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है, कि बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटीज पर नजर रखना कितना जरूरी है। डिजिटल दुनिया की खतरनाक साइड से बच्चों को बचाना हमारी जिम्मेदारी है।
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