R Ashwin Retirement
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    R Ashwin Retirement: टीम इंडिया के ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इंडियन प्रीमियर लीग से संन्यास की घोषणा की है। यह फैसला उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायरमेंट के कुछ महीने बाद लिया है। 38 वर्षीय अश्विन ने अपने करियर में कई टीमों का प्रतिनिधित्व किया है और सबसे आखिरी बार 2025 सीजन में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेले थे।

    अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अश्विन ने लिखा, “आज का दिन बहुत खास है, इसलिए एक नई शुरुआत भी खास होगी। कहते हैं, कि हर अंत के साथ एक नई शुरुआत होती है। आज मेरा IPL खिलाड़ी के रूप में समय खत्म हो गया है, लेकिन दुनिया भर की विभिन्न लीगों में खेल के खोजकर्ता के रूप में मेरा समय आज शुरू होता है।”

    सभी टीमों को धन्यवाद-

    अश्विन ने अपने भावुक संदेश में उन सभी टीमों का शुक्रिया अदा किया, जिनके लिए उन्होंने पिछले 16 सालों में खेला। उन्होंने कहा, “मैं उन सभी टीमों का धन। क्योंकि वे टेस्ट क्रिकेट में 537 विकेट लेकर भारत के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज बने थे। सिर्फ अनिल कुंबले के 619 विकेट का रिकॉर्ड उनसे आगे है। अश्विन की खासियत यह थी, कि वे सिर्फ गेंदबाजी में ही नहीं बल्कि मैदान पर अपनी शार्प थिंकिंग के लिए भी फेमस थे। उनकी रणनीति और खेल समझने की क्षमता को हमेशा सराहा जाता रहा है।

    IPL में 16 साल का सफर-

    साल 2009 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ IPL में पदार्पण करने वाले अश्विन का यह सफर बेहद रोचक रहा। 2025 में भी उनका आखिरी मैच चेन्नई की पीली जर्सी में ही था, जब उन्होंने मेगा नीलामी में 9.75 करोड़ रुपए की कीमत पर टीम को फिर से ज्वाइन किया था। यह एक दशक के अंतराल के बाद उनकी चेन्नई में वापसी थी।

    अपने पूरे IPL करियर में अश्विन ने 220 मैच खेले और 187 विकेट लिए। उनका गेंदबाजी औसत 30.22 रहा और बेहतरीन गेंदबाजी के आंकड़े 4/34 के थे। बल्लेबाजी में भी वे शानदार थे, 833 रन बनाए जिसमें सर्वोच्च स्कोर 50 रन रहा और औसत 13.02 था।

    चैंपियनशिप का स्वाद-

    अश्विन ने चेन्नई के साथ 2010 और 2011 में IPL खिताब जीते थे। इसके बाद उन्होंने राइजिंग पुणे सुपरजायंट, पंजाब किंग्स, दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स जैसी टीमों के लिए भी खेला। हर टीम में उन्होंने अपनी अनूठी शैली और अनुभव से योगदान दिया। 2025 के अपने आखिरी सीजन में अश्विन ने चेन्नई के लिए 9 मैच खेले, लेकिन सिर्फ 7 विकेट ही ले पाए। यह सीजन टीम के लिए भी निराशाजनक रहा, क्योंकि चेन्नई अंकतालिका में सबसे नीचे रही।

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    मैदान पर एक चतुर दिमाग-

    अश्विन को सिर्फ एक गेंदबाज के रूप में नहीं, बल्कि मैदान पर एक कुशल रणनीतिकार के रूप में भी जाना जाता था। उनकी चतुराई और खेल की गहरी समझ ने उन्हें IPL में सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में से एक बनाया। कप्तानों और कोचों का भरोसा हासिल करना उनके लिए कभी मुश्किल नहीं रहा। विभिन्न परिस्थितियों में अपनी गेंदबाजी को ढालने की उनकी कला अद्वितीय थी। चाहे पावरप्ले हो या धीमे ओवर्स, हर स्थिति में वे अपनी टीम के लिए सफलता लाते रहे।

    अब अश्विन अंतरराष्ट्रीय लीगों में अपना हुनर दिखाने के लिए तैयार हैं। अश्विन की यह विदाई एक युग का अंत है, लेकिन उनकी उपलब्धियां और यादें हमेशा प्रशंसकों के दिलों में जिंदा रहेंगी। उन्होंने न सिर्फ अपने लिए बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट के लिए गौरव हासिल किया है।

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