Cheteshwar Pujara Retirement
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    Cheteshwar Pujara Retirement: भारतीय क्रिकेट के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक चेतेश्वर पुजारा ने रविवार को सभी फॉर्मेट्स से अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी। 36 साल के इस बल्लेबाज ने दो दशक का अपना शानदार करियर समेटते हुए, एक इमोशनल पोस्ट के जरिए फैन्स को अलविदा कहा। पुजारा ने आखिरी बार भारत के लिए 2023 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ द ओवल में खेला था।

    सोशल मीडिया पर अपनी रिटायरमेंट की घोषणा करते हुए पुजारा ने लिखा, “इंडियन जर्सी पहनना, एंथम गाना और हर बार फील्ड पर उतरकर अपना बेस्ट देना, इसे शब्दों में बयान करना नामुमकिन है, कि यह क्या मतलब रखता था। लेकिन जैसा कि कहते हैं, सभी अच्छी चीजों का अंत होता है और बेहद कृतज्ञता के साथ मैंने इंडियन क्रिकेट के सभी फॉर्म्स से रिटायर होने का फैसला किया है। आपके सारे प्यार और सपोर्ट के लिए धन्यवाद।”

    दो दशकों का सफर और यादगार पल-

    पुजारा ने अपनी पोस्ट के साथ एक लेंबी स्टेटमेंट भी अटैच की, जिसमें उन्होंने अपने दो दशकों के सफर के बारे में बात की। उन्होंने टीममेट्स, कोचेज, फैन्स और फैमिली के प्रति अपना आभार जताया। उन्होंने कहा, कि भारत को रिप्रेजेंट करना एक सम्मान था और क्रिकेट ने उन्हें जो यादें और सबक दिए, उन्हें वह हमेशा याद रखेंगे।

    पुजारा इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायर होते समय भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में आठवें सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उन्होंने 43.60 की एवरेज से 7195 रन बनाए, जिसमें 19 सेंचुरीज और 35 फिफ्टीज शामिल हैं। 2010 में डेब्यू के बाद उन्होंने भारत के लिए 103 टेस्ट और 5 वनडे खेले।

    ‘द वॉल’ बने पुजारा की शानदार पारियां-

    एक दशक से ज्यादा समय तक पुजारा ने नंबर 3 पोजिशन पर भारत के रॉक की तरह काम किया और टीम की कई यादगार टेस्ट जीतों में अहम रोल प्ले किया। घर और विदेश दोनों जगह उनकी परफॉर्मेंस शानदार रही। उनकी सबसे आइकॉनिक परफॉर्मेंसेज में से एक 2018/19 की ऑस्ट्रेलिया टूर में आई, जहां उन्होंने भारत की हिस्टॉरिक सीरीज जीत में सेंट्रल रोल प्ले किया था।

    उस टूर में पुजारा ने 521 रन बनाए, 1,258 बॉल्स फेस कीं और तीन सेंचुरीज लगाईं। उनके इस साहसी प्रदर्शन की तुलना लेजेंडरी सुनील गावस्कर के 1970/71 वेस्टइंडीज टूर के 774 रन के हॉल से की गई थी। पुजारा की यह परफॉर्मेंस आज भी भारतीय क्रिकेट हिस्ट्री के सुनहरे पन्नों में दर्ज है।

    आखिरी समय तक बना रहा जुनून-

    दिलचस्प बात यह है, कि पुजारा के रिटायरमेंट का फैसला उस समय आया, जब महज तीन महीने पहले उन्होंने इंग्लैंड टूर के लिए इंडियन स्क्वाड का हिस्सा बनने की अपनी हंगर और को डिजायर जताया थी। पिछले रणजी ट्रॉफी सीजन में उन्होंने सौराष्ट्र के लिए सात गेम्स खेले और 40.20 की एवरेज से 402 रन बनाए, जिसमें छत्तीसगढ़ के खिलाफ एक डबल सेंचुरी भी शामिल थी।

    उन्होंने पिछले साल ससेक्स के लिए छह फर्स्ट-क्लास काउंटी गेम्स भी खेले और 501 रन बनाए। लेकिन बदकिस्मती से उन्हें इंडियन टीम में वापसी नहीं मिली। उनकी कॉम्पिटिटिव क्रिकेट में लास्ट अपीयरेंस इस साल फरवरी की शुरुआत में आई थी, जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल में घर पर गुजरात के खिलाफ 26 और 2 रन बनाए थे।

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    टेस्ट क्रिकेट के सच्चे योद्धा-

    पुजारा को टेस्ट क्रिकेट का सच्चा योद्धा कहना गलत नहीं होगा। उन्होंने हमेशा से पेशेंस और कन्सिस्टेंसी के साथ खेला। जब भी टीम मुसीबत में होती, पुजारा की मजबूत बल्लेबाजी पर भरोसा किया जा सकता था। उनकी स्टाइल भले ही फ्लैशी न हो, लेकिन वह इफेक्टिव जरूर थी। लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहना और ऑपोजिशन बॉलर्स को फ्रस्ट्रेट करना उनकी खासियत थी।

    पुजारा की रिटायरमेंट से भारतीय क्रिकेट में एक एरा का अंत हुआ है। वह उन गिने-चुने बल्लेबाजों में से एक थे, जो टेस्ट क्रिकेट की सच्ची स्पिरिट को समझते थे। उनका यह फैसला भले ही दुखदाई हो, लेकिन उन्होंने भारतीय क्रिकेट को जो कुछ दिया है, वह हमेशा याद रखा जाएगा।

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