Ways to Change Luck: हम अक्सर कहते हैं, कि फलाने की तो किस्मत ही अच्छी है। हर काम में कामयाबी, मुश्किलें आसानी से पार हो जाती हैं और मौके खुद ही चलकर आ जाते हैं। लेकिन क्या कभी सोचा है, कि यह किस्मत असल में बनती कैसे है? सच यह है, कि जिन लोगों को हम लकी मानते हैं, वे अपनी शामों में कुछ खास रिचुअल्स फॉलो करते हैं, जो बाकी लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
शाम का वक्त वो समय होता है जब दिन की भागदौड़ थमती है, मन शांत होता है और हमारी इनर वॉइस सबसे साफ सुनाई देती है। और यही वजह है कि सफल और किस्मतवाले लोग अपनी शामों को बहुत सोच-समझकर गुजारते हैं। ये पांच आदतें भले ही साधारण लगें, लेकिन इनमें छिपा है किस्मत को अपनी तरफ खींचने का असली राज।
दिन का इमोशनल बोझ उतार देना जरूरी है-
ज्यादातर लोग अपने दिन की परेशानियों, गुस्से, और तनाव को अगले दिन तक घसीटते रहते हैं। लेकिन किस्मतवाले लोग ऐसा नहीं करते। वे शाम को एक जेंटल रिचुअल फॉलो करते हैं जिसमें वे अपने मन का बोझ हल्का कर लेते हैं। कोई थोड़ी देर शांत बैठकर सोचता है, कोई वॉक पर जाता है, कोई गहरी सांसें लेता है, या बस खुद से कहता है, कि आज जो हुआ वो कल तक नहीं ले जाना है।
यह कोई फेक पॉजिटिविटी नहीं है, बल्कि इमोशनल हाइजीन है। जब आप रात को अपने स्ट्रेस, गुस्से या चिढ़ को रिलीज कर देते हैं, तो आपके मन में एक क्लीन स्पेस बन जाती है जहां बेहतर विचार, आइडियाज और मौके आ सकते हैं। भरे हुए दिमाग में किस्मत के लिए जगह नहीं होती।
गलतियों को सबक में बदलना आता है इन्हें-
जिन लोगों की किस्मत खराब रहती है, वे अपनी गलतियों को बार-बार याद करके खुद को कोसते रहते हैं। लेकिन लकी पीपल अपने दिन को एक ऑब्जर्वर की तरह रिप्ले करते हैं, न कि क्रिटिक की तरह। वे खुद से पूछते हैं कि आज क्या अच्छा हुआ, क्या बेहतर हो सकता था, और आज के दिन ने उन्हें क्या सिखाया।
यह ईमानदार और न्यूट्रल सेल्फ चेक-इन उन्हें एक ही पैटर्न दोहराने से बचाता है। वे अपनी गलतियों को तबाही नहीं बल्कि एडजस्टमेंट में बदल देते हैं। यूनिवर्स उन लोगों को ज्यादा देता है जो दिखाते हैं कि वे अपने पास जो है उससे सीख सकते हैं। जब आप बिना शर्म के रिफ्लेक्ट करते हैं, तो बिना जोर लगाए एवोल्व होते हैं, और एवोल्यूशन मैग्नेटिक होता है।
कल के लिए छोटे-छोटे इरादे सेट करना-
हाई लकी पीपल अपनी सुबहों को अचानक अटैक नहीं होने देते। रात को सोने से पहले वे अगले दिन के लिए एक छोटी सी प्लानिंग कर लेते हैं। ये कोई सख्त शेड्यूल नहीं होते बल्कि सॉफ्ट इंटेंशन्स होते हैं जैसे कल मैं ज्यादा कॉन्फिडेंस से बोलूंगा, एक जरूरी काम जरूर पूरा करूंगा, या अपनी एनर्जी को प्रोटेक्ट करूंगा।
ये माइक्रो इंटेंशन्स छोटे एंकर्स की तरह काम करते हैं, जो आपके माइंड को बताते हैं, कि जब दिन शोर मचाने लगे तो कहां जाना है। किस्मत अक्सर उस पल की शक्ल में आती है। जिसके लिए आप तैयार थे और इंटेंशन्स वो तैयारी क्रिएट करते हैं, बिना प्रेशर के।
शांत और धीमी शाम से आती है क्लैरिटी-
लकी पीपल की शामों में एक खास रिदम होता है जो स्लो, सॉफ्ट और इंटेंशनल होता है। वे लाइट्स डिम कर लेते हैं, स्टिमुलेशन कम करते हैं, जल्दी अनप्लग हो जाते हैं और अपने नर्वस सिस्टम को कैल्म होने देते हैं। यह वही इंटरनल स्टेट क्रिएट करता है जिसमें क्लैरिटी सरफेस कर सकती है और क्लैरिटी वो जगह है जहां असली किस्मत शुरू होती है।
जब आपका बॉडी स्लो होता है, तो आपका इंट्यूशन बोलता है। जब इंट्यूशन बोलता है, तो आप बेहतर च्वॉइसेस करते हैं। बेहतर च्वॉइसेस बेहतर आउटकम्स लाती हैं। बाहर से जो कोइंसिडेंस लगता है, वो अक्सर सिर्फ कोई ऐसा इंसान होता है जो अपनी खुद की विजडम सुनने के लिए काफी रेस्टेड है।
शुक्रगुजारी की आदत बदल देती है नजरिया-
ग्रैटिट्यूड लकी पीपल के लिए कोई रिचुअल नहीं है, बल्कि वो लेंस है, जिससे वे जीते हैं। हर शाम वे रुककर मेंटली कुछ चीजों को एक्नॉलेज करते हैं जो सही हुईं, भले ही दिन कितना भी कैओटिक रहा हो। इसलिए नहीं कि लाइफ परफेक्ट है, बल्कि इसलिए क्योंकि ग्रैटिट्यूड उन पाथवेज को मजबूत करता है जो पॉसिबिलिटी नोटिस करते हैं न कि कमी को।
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लकी पीपल के पास ज्यादा ब्लेसिंग्स नहीं होते, बस वे ज्यादा नोटिस करते हैं और जब आप ज्यादा नोटिस करते हैं, तो आप सपोर्टेड फील करते हैं। जब आप सपोर्टेड फील करते हैं, तो ज्यादा अलाइंड एक्शन लेते हैं और अलाइंड एक्शन वो मिट्टी है जिसमें किस्मत उगती है। कभी-कभी यह बस एक छोटी सी चीज पर शांत स्माइल होती है, एक काइंड मैसेज, एक स्मूद कम्यूट, एक गुड आइडिया, या पीस का एक पल। ग्रैटिट्यूड ऑर्डिनरी को एविडेंस में बदल देता है कि लाइफ आपके साथ काम कर रही है, आपके खिलाफ नहीं।
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