Hotel Check in Tips
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    Hotel Check in Tips: होटल के कमरे में दाखिल होते ही ज्यादातर यात्री सबसे पहले बैग खोलकर सामान रखना शुरू कर देते हैं। लेकिन यही वह गलती है, जो बाद में भारी पड़ सकती है। दरअसल, चेक-इन के तुरंत बाद रूम की तस्वीरें न लेना एक ऐसी भूल है जो विवादों को जन्म दे सकती है। जब आप कमरे में प्रवेश करते हैं, तो सबकुछ ठीक दिखता है।

    बिस्तर सजा हुआ है, लाइटें काम कर रही हैं। लेकिन करीब से देखने पर छोटी-छोटी खामियां नजर आती हैं। मेज पर खरोंच, दीवार पर दाग या मिनीबार जो बिल्कुल नया नहीं लगता। ये बातें नॉर्मली बड़ी नहीं लगतीं, लेकिन चेकआउट के वक्त यही चीजें आपके खिलाफ सबूत बन सकती हैं।

    क्यों जरूरी है फोटो का सबूत-

    ज्यादातर होटल स्टे बिना किसी परेशानी के गुजर जाते हैं, लेकिन समस्या तब होती है, जब कुछ गड़बड़ हो जाए। कभी-कभी होटल मैनेजमेंट ऐसे नुकसान का आरोप लगा देता है, जो आपने किया ही नहीं। मिनीबार के इस्तेमाल को लेकर विवाद या गायब सामान का दावा भी आम है। ऐसी स्थिति में बातचीत धुंधली हो जाती है और याददाश्त काम नहीं आती।

    चेक-इन के समय ली गई तस्वीरें, एक स्पष्ट प्रारंभिक रिकॉर्ड बनाती हैं। ये दिखाती हैं, कि आपके आने से पहले कमरा कैसा था। बीमा कंपनियां और होटल स्टाफ अक्सर तारीख और प्रमाण मांगते हैं,़ और चेक-इन के कुछ मिनटों के भीतर ली गई तस्वीरें यह सवाल चुपचाप हल कर देती हैं।

    टाइमिंग क्वालिटी से ज्यादा मायने रखती है-

    इन तस्वीरों को खूबसूरत होने की जरूरत नहीं है, बल्कि समय पर लिए जाने की जरूरत है। पहले कुछ मिनटों में खींची गई तस्वीरों का वजन बाद में ली गई परफेक्ट फोटो से ज्यादा होता है। फोन में मेटाडेटा अपने आप समय रिकॉर्ड करता है और यह टाइमस्टैम्प अक्सर शार्प फोकस से ज्यादा अहम होता है।

    कमरे की दो वाइड शॉट, बाथरूम का एक वीडियो और कुछ क्लोज-अप इमेज काफी हैं। मकसद डिटेल दिखाना नहीं, बल्कि संदर्भ बनाना है, कि यह पहले से यहां था, आपकी वजह से नहीं हुआ।

    किन जगहों की तस्वीर लेना न भूलें-

    ज्यादातर लोग सिर्फ बेड और बाथरूम की फोटो लेते हैं। छत की भी तस्वीर लें क्योंकि वहां लीकेज और दाग दिख सकते हैं। स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर को फोटो में कैद करें। अलमारी और दराज खोलकर दिखाएं। सेफ खाली है, यह साबित करें।

    तौलिये और बाथरोब की गिनती क्लियर हो, इसके लिए उन्हें भी फोटो में शामिल करें। खिड़कियां और ताले चेक करें। अगर कुछ ढीला या टूटा लगे, तो एक बार वीडियो बना लें। ये छोटी डिटेल्स अक्सर विवाद की जड़ बनती हैं और इन्हें शुरुआत में कैप्चर करने से बाद में समझाने की जरूरत नहीं पड़ती।

    होटल को बताने की जरूरत नहीं-

    आपको इसकी घोषणा करने की आवश्यकता नहीं है। यह कोई आरोप नहीं है। होटल भी कमरों की रिकॉर्डिंग करते हैं, लेकिन वे रिकॉर्ड उनके होते हैं। आपकी तस्वीरें बस आपके अपने नोट्स हैं। अगर कोई समस्या मिले, तो शुरुआत में ही विनम्रता से रिपोर्ट करें और बता दें कि आपने फोटो ली हैं ताकि कोई भ्रम न रहे।

    ज्यादातर स्टाफ स्पष्टता की सराहना करते हैं, क्योंकि इससे उनका भी समय बचता है। तनाव तब पैदा होता है, जब चुप्पी के बाद चेकआउट पर अचानक विवाद उठता है। डॉक्यूमेंटेशन चीजों को शांत रखता है।

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    चेकआउट से पहले यह भी करें-

    चेकआउट से पहले कुछ अंतिम तस्वीरें लें। कमरा जैसा आप छोड़ रहे हैं, वैसा दिखाएं। अगर याद हो तो वही एंगल इस्तेमाल करें। यह स्टे को ब्रैकेट करता है और बिना किसी स्पष्टीकरण के पहले और बाद की तस्वीर देता है। इन इमेज को कुछ हफ्तों तक स्टोर करें। अगर कुछ नहीं होता, तो बाद में डिलीट कर दें। ज्यादातर बार इनका इस्तेमाल नहीं होगा और यह ठीक है। इनकी असली वैल्यू इस बात में है, कि जरूरत पड़ने पर ये मौजूद थीं।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।