Heatstroke: भारत में इस बार गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में भारत के कई शहर शामिल हैं और कई राज्यों में लू की आधिकारिक चेतावनी जारी की जा चुकी है। लेकिन यह सोचना बंद कर दीजिए, कि यह सिर्फ असुविधा की बात है। डॉ. ने चेतावनी दी है, कि लू के दौरान तापमान में वृद्धि विशेष रूप से दिमाग के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है।
दिमाग को क्यों लगती है सबसे ज़्यादा चोट?
शरीर के बाकी अंगों की तुलना में दिमाग तापमान परिवर्तन के प्रति सबसे संवेदनशील होता है। इसे सही तरीके से काम करने के लिए एक स्थिर आंतरिक वातावरण की ज़रूरत होती है। डॉ. मनसुखानी बताते हैं, कि जब शरीर ज़्यादा गर्मी में खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है तो डिहाइड्रेशन होती है। डिहाइड्रेशन से खून की मात्रा कम होती है और जब खून कम होता है तो दिमाग तक ऑक्सीजन की आपूर्ति भी कम हो जाती है। इसी ऑक्सीजन की कमी से चक्कर आना, भ्रम होना, सिरदर्द और गंभीर मामलों में बेहोशी हो सकती है।
40 डिग्री से ऊपर-
डॉ. ने एक और चौंकाने वाली बात बताई, जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है, तो ब्रेन स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। गर्मी से रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं, रक्तचाप कम हो जाता है और दिमाग को ऑक्सीजन मिलनी और कम हो जाती है। इससे एक खतरनाक दुष्चक्र शुरू हो जाता है, कम ऑक्सीजन, कमज़ोर रक्त संचार और तनाव में दिमाग। इसके अलावागर्मी दिमाग और रक्त वाहिकाओं के बीच की सुरक्षात्मक परत को नष्ट कर सकती है, जिससे कोशिकाओं को नुकसान और सूजन हो सकती है जो याददाश्त, एकाग्रता और समन्वय को प्रभावित करती है।
सबसे ज़्यादा खतरा किसे है?
बुज़ुर्ग, बच्चे और पुरानी बीमारियों से ग्रस्त लोग सबसे ज़्यादा जोखिम में हैं। उनका शरीर तापमान को उतनी कुशलता से नियंत्रित नहीं कर पाता। लंबे समय तक गर्मी में रहने पर उनके लिए परिणाम और गंभीर हो सकते हैं।
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बचाव के उपाय-
पर्याप्त पानी पीना सबसे पहला बचाव है। दोपहर की धूप में बाहर निकलने से बचें, हल्के और सांस लेने वाले कपड़े पहनें और घर में हवादार माहौल रखें। अत्यधिक थकान, भ्रम या मलती जैसे शुरुआती संकेतों को पहचानना जीवनरक्षक हो सकता है।
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