World Air Quality Index
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    World Air Quality Index: कुछ खबरें ऐसी होती हैं, जो सुनकर दिल भारी हो जाता है और आज की खबर बिल्कुल वैसी ही है। बधाई देने का मन नहीं करता, लेकिन सच बोलना जरूरी है। वर्ल्ड एयर क्वालिटी इंडेक्स ने पिछले पूरे साल की फाइनल रिपोर्ट जारी की है और उसमें टॉप पर जो नाम है, वो है गाजियाबाद का लोनी। जी हां, पूरी धरती पर सबसे जहरीली हवा यहीं पर है। यह कोई लोकल रिपोर्ट नहीं, बल्कि वर्ल्ड लेवल का डेटा है, जो हर देश के शहरों को कंपेयर करके तैयार किया जाता है।

    क्या है वर्ल्ड एयर क्वालिटी इंडेक्स और क्यों मानें इसे?

    वर्ल्ड एयर क्वालिटी इंडेक्स कोई मामूली सर्वे नहीं है। यह एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म है, जो दुनियाभर के हजारों शहरों की हवा को मेज़र करता है और हर साल एक कंपेरेंसिव एनुअल रिपोर्ट जारी करता है। इसमें PM2.5 जैसे खतरनाक पार्टिकल्स को ट्रैक किया जाता है, जो सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में घुस जाते हैं। जब इस रिपोर्ट में कोई शहर टॉप पर आता है, तो इसका मतलब होता है, कि उस शहर की हवा धरती पर सबसे ज्यादा जानलेवा है और इस बार यह दुखद ताज गाजियाबाद के लोनी इलाके के सिर पर आ गिरा है।

    लोनी एक नाम, एक दर्द-

    लोनी गाजियाबाद का वो इलाका है, जो दिल्ली के बॉर्डर से बिल्कुल सटा हुआ है। यहां घनी आबादी है, इंडस्ट्रियल एक्टिविटि है, खुले में कचरा जलाने की समस्या है और ट्रैफिक का भयंकर बोझ है। यह सब मिलकर एक ऐसा जहरीला कॉकटेल बनाते हैं, जिसे हर रोज यहां के लाखों लोग सांस के साथ अंदर लेते हैं। बच्चे हों, बुजुर्ग हों या जवान कोई भी इस जहर से बचा नहीं है और सबसे दुखद बात यह है, कि यहां रहने वाले ज्यादातर लोग मजबूरी में रहते हैं, चाहकर नहीं।

    जब अपना घर हो उसी शहर में-

    इस रिपोर्ट की बात करने वाले एक जागरूक नागरिक ने खुद माना, कि उनका भी एक घर गाजियाबाद में है। उनके शब्दों में “अगर यह सिर्फ India का रिपोर्ट होता, तो शायद मैं चुप रह जाता। लेकिन जब पूरी धरती की रिपोर्ट में हमारा शहर सबसे ऊपर हो तो अब मुंह में कुछ बोलने को बचा ही नहीं।” यह दर्द सिर्फ एक शख्स का नहीं, बल्कि हर उस इंसान का है, जिसका कोई अपना इस शहर में रहता है।

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    यह खबर एक चेतावनी है-

    गाजियाबाद का वर्ल्ड पॉल्यूशन में नंबर 1 आना महज एक स्टेटिक नहीं है, यह एक अलार्म बेल है। सरकार को, प्रशासन को और हम सबको मिलकर इस पर सिरियसली सोचना होगा। अगर अभी नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ी को साफ हवा में सांस लेने के लिए भी स्ट्रगल करना पड़ेगा।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।