Extinct Animals
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    Extinct Animals: जिस वक्त इंसान ने पहला हथियार बनाया था, उसी वक्त हज़ारों स्पिसीज़ का Extinct होना तय हो गया था। लेकिन आज भी उन Extinct एनिमल के रेलेटिव्स आज भी ज़िंदा हैं। उनके ज़रिए उन एनिमल्स को वापिस लाया जाना है और उनमें से कुछ को तो वापिस लाया भी चुका है, तो इस वीडियो को आखिर तक ज़रुर देखना-

    ग्राउंड स्लोथ (Extinct Animals)-

    वैसे आप लोग दुनिया के सबसे स्लो एनिमल स्लोथ को जानते ही होंगे, यह यकिनन प्रेज़ेंट एज में एक केट के साइज़ को होते हैं, लेकिन आइज़ एज के ज़माने में मॉडर्न डे स्लोथ से कई गुना बड़े ग्राउंड स्लोथ इस दुनिया में घुमा करते हैं और कंपेरिज़न के लिए ग्राउंड स्लोथ एक एलिफेंट के जितने हुआ करते थे। वैसे ग्राउंड स्लोथ एक हर्बी वॉरस एनिमल थे और वह ज्यादातर वुडलैंड्स और ग्रास लैंड्स में रहना पसंद करते थे। इसी वजह से ना इनकी कोई खास प्रीज़र्व्ड बॉडी मिली है और ना ही कुछ खास डीएनए को एक्सट्रैक्ट किया गया है। इसलिए जो वाजिब तरीका दुनिया में इनको किसी तरह से वापिस लाने का यह है कि इनके रिलेटिव्स ट्री स्लोथ्स में क्रिस्पर नाम की टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करके ग्राउंड स्लोथ जैसा एक एनिमल तैयार कर लिया जाए, वैसे क्रिस्पर एक ऐसी टेक्नॉलॉजी है, जिससे किसी भी लिविंग ऑर्गेनिस्ट के जीन में एडिटिंग करके उसे मॉडिफाई किया जा सकता है और ऐसा माना जाता है कि इसी टेक्नॉलॉजी से हमें आने वाले दौर में सुपरह्युमन भी देखने को मिलेंगे।

    थायलासाइन (Extinct Animals)-

    इमेजिन करो एक डॉग, टाइगर और कंगारु का हाइब्रिड कैसा होगा, जी हां थायलासाइन नामी मार्सोपियल कुछ इसी तरह से दिखाई देते थे, वेल ये ऑस्ट्रेलिया और ताज़मेनिया में पाए जाते थे, लेकिन जब डिंगोना में डॉग की ब्रीड इंसानों के ज़रिए ऑस्ट्रेलिया में इंट्रोड्यूज़ करवाई गई, तो थायलासाइन कॉम्प्टीशन की वजह से ऑस्ट्रेलिया से 3,000 साल पहले ही एक्सटिंक्ट हो गए थे और जो थोड़ी बहुत पॉपुलेशन ताज़मेनिया में बची उसे ब्रिटिश कॉलोनिस्ट के ज़रिए हंटिंग करके एक्सटिंक्ट कर दिया गया। ये जो आप पोटो और वीडियो देख रहे हैं, ये इस दुनिया की आखिरी थायलासाइन की है, जो ज़ू में पूअर ट्रिटमेंट की वजह से 1936 में मर गई थी। लेकिन इनके 750 से भी ज्यादा वेल प्रिजर्व्ड स्पेसिमेंस दुनिया भर के म्यूज़ियम में मौजूद हैं, इवन कुछ यंग थायलासाइन जो उनकी मदर के पाउच से निकाल लिए गए थे, वह आज भी इथेनॉल में प्रिज़र्व्ड हैं। इसलिए 2018 में इनका जिनोम पूरी तरह से सीक्वेंसड कर लिया गया था। सिंपल लफ्ज़ों में जीनोम वो एनटायर कलेक्शन ऑफ डीएनए होता है, जिसमें यह तय होता है कि किसी लिविंग ऑग्रेनिज़्म को कैसे डेवलप होना है। यही जीनोम डिसाइड करता है किसी प्लांट को प्लांट बनना है और इंसान को इंसान और फैट टेल्ड डोनट्स (Fat Tailed Dunnarts) जो थायलासाइन से 95 परसेंट जेनिटिक्ली सिमिलर हैं, उनके एंब्रियो में थायलासाइन के 5 परसेंट जींस क्रिस्पर से एडिट करके थायलासाइन को पैदा किया जाएगा और बहुत ही जल्द इन्हें ताज़मेनिया के जंगलों में रिइंट्रोड्यूज़ भी कर दिया जाएगा।

    वुली राइनो सेरोस-

    यह राइनोस आइज़ एज के ठंडे इलाकों में रहते थे, इसीलिए उनकी बॉडी में बाल हद से ज्यादा होते थे और साथ में इनका साइज भी काफी बड़ा होता था। इसी वजह से वुली राइनोज और मॉडर्न डे राइनोज से तो कई गुना डिफरेंट दिखाई देते थे। लेकिन जब आइस एज खत्म हुआ, तो क्लाइमेट चेंज की वजह से और इंसानी हंटिंग की वजह से बुली राइनोस एक्सटिंक्ट हो गए, पर हां इनकी बॉडीज आज भी साइबेरिया के ठंडे इलाकों से मिलती रहती है। लेकिन अब तक कोई खास हाई क्वालिटी जेनेटिक मैटेरियल हासिल नहीं हुआ है। इसीलिए, जो आसान तरीका इनको दुनिया में वापस लाने का है, वह यह है कि इंडोनेशिया में पाए जाने वाले इनके क्लोजेस्ट रिलेटिव्स सुमात्रण राइनोसेरॉस जिनकी बॉडी में का कोर्स वली राइनोज के जितने बोल तो नहीं है, लेकिन फिर भी इनकी सिलेक्टिव ब्रीडिंग करके इनसे वुली राइनोस की तरह एनिमल बनाया जा सकता है। मान लें, की दो सुमात्नर राइनोस के जेनेटिक्स में प्रॉब्लम की वजह से स्कीन में बाल थोड़े ज्यादा आ गए और अगर हम इन्हें सेलेक्ट करके इनकी आगे नस्ल चलाएंगे, तो हमें उनके बच्चे भी ज्यादा हेयर वाले देखने को मिलेंगे। वैसे कुछ इसी तरह से हमने वव्स की सिलेक्टिव ब्रीडिंग करके, अब तक 340 डॉग ब्रीड्स बनाई है, पर हां असल प्रॉब्लम यह है, कि सुमात्रण राइनोसेरॉस खुद इस दुनिया में 50 से भी कम बचे हैं और अगर जल्द ही इनकी पॉपुलेशन कंट्रोल करके बढ़ाई नहीं गई, तो शायद यह भी एक्सटिंक्ट हो जाएंगे और वुली राइनोस को इस दुनिया में लाना एक सपना ही रह जाएगा।

    क्वागा-

    देखने में यह क्वागा शायद आपको हॉर्स और जेब्रा का हाइब्रिड लग रहा होगा, लेकिन असल में यह जेब्रा की सब स्पीशीज थे, जो अपने यूनिक तरह के स्ट्राइब पैटर्न की वजह से बिल्कुल अलग दिखाई देते थे। वेल जब डच और ब्रिटिश कॉलोनिस्ट ने साउथ अफ्रीका में आए, तो उन्होंने हद से ज्यादा हंटिंग करके, क्वागा को इस दुनिया से एक्सटिंक्ट कर दिया था, लेकिन दोस्तों क्वागा के एक्सटिंक्ट होने के 100 साल बाद 1987 में क्वागा प्रोजेक्ट नामी क्वागा को वापसी लाने का सिलसिला शुरू किया गया। जिसमें उनके क्लोज़ेस्ट रिलेटिव प्लेन ज़ेबराज़ की सिलेक्टिव ब्रीडिंग की गई, वही सिलेक्टिव ब्रीडिंग जिसके बारे में मैने आपको अभी बताया है, अब तक इस दुनिया में तकरीबन 150 से भी ज्यादा क्वागा जैसे ज़ेबरा प्रोड्यूस्ड किए जा चुके हैं, जिनमें से 12 से 15 क्वागा, तो इनके नेचुरल हैबिटेट में इंट्रोड्यूस्ड भी कर दिए गए हैं।

    डोडो-

    डोडो पिज़न से इवॉल्व हैं, डोडो के दिमाग में डर जैसी चीज बिल्कुल भी एक्जिस्ट नहीं करती थी। इसी वजह से जब 1638 में कुछ डट सोल्जर इनके हैबिटेट मॉरीशस आईलैंड में आए, तो ना सिर्फ डोडो का शिकार करके उनको खाना शुरू कर देते हैं, बल्कि यह मंकी, रेट, केट और डॉग जैसे शिकारी एनिमल्स भी इन्ट्रोड्यूज़ड करवा देते हैं। इसी वजह से डोडो अराउंड 1690 में एक्सटिंक्ट हो गए थे। लेकिन खुशी की बात तो यह है, कि डोडो बहुत ही जल्द इस दुनिया में वापस आ रहे हैं, क्योंकि हमारे थायलासाइन की तरह डोडो के प्रीसर्व्ड स्पेसिमेंस मौजूद हैं। खासतौर में ऑक्सफोर्ड का डोडो नामी डोडो का हेड, जो इस वक्त बेहतर हालत में है। इसलिए 2022 में इनका जीनोम सीक्वेंस कर लिया गया था और यहां भी निकोबार पिजन जो सबसे ज्यादा क्लोजेस्ट पिजन की स्पीशीज है, डोडो से। उनको होस्ट चुनकर उनके एग में क्रिस्पर के जरिए जीन एडिटिंग करके बहुत ही जल्द डोडो को वापस इस दुनिया में लाया जाएगा।

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    वुली मेमद-

    वुली मेमद इस दुनिया के सबसे फेमस एक्सटिंक्ट एनिमल्स हैं, पर हां यह सबसे बड़े एलीफेंट नहीं थे। क्योंकि यह टाइटल तो इंडिया और पाकिस्तान में पाए जाने वाले पेलियोलॉक्सीडस नॉमेडिकस के पास है। वुली मेमद के इतने खास होने की वजह उनकी बॉडी थी। जो आइस एज में कितनी भी सर्दी हो, उसे आराम से बर्दाश्त कर लिया करती थी। हालांकि जब आइस एज खत्म होने लगी, तो इनकी पापुलेशन भी काफी कम हो गई। साथ ही साथ इंसानों ने न सिर्फ इन्हें अपने खाने के लिए हंट किया। बल्कि यह मेमद की हड्डियों अपने रहने के लिए सेल्टर भी बनाया करते थे और ऐसे ही आज से 10,000 साल पहले यह जॉइंट्स एक्सटिंक्ट हो गए थे। लेकिन हां उनकी एक आइसोलेटेड पापुलेशन पिरामिड गीज़ा बनने के बाद भी 800 साल तक सरवाइव की थी। हालांकि प्रेज़ेंट डे में तो इनके फॉसिल्स जगह-जगह से डिस्कवर होते रहते हैं। लेकिन कई बार आइस एज के ज़माने से जमे हुए प्रिजर्व्ड मेमद साइबेरिया से मिले हैं। इवन एक बार तो 3000 साल पुराने में मेमद से हमें ब्लड भी मिला था। इसलिए इनका भी जीनोम 2015 में सीक्वेंस कर लिया गया था और बहुत जल्दी एशियन एलिफेंट्स, जो की मेमद से 99.6% जेनेटिकली सिमिलर हैं, उनके एंब्रियो में 0.4% मेमद के जीन्स क्रिस्पर्स एडिट करके एक मेमद और एशियन एलीफेंट का हाइब्रिड पैदा किया जाएगा और सिलेक्टिव ब्रीडिंग करके बिल्कुल मेमद जैसा एलीफेंट दोबारा इस दुनिया में तकरीबन 2027 तक आ जाएगा। वेल थायलासाइन, डोडो और मेमद को वापस लाने वाली Colossal Biosciences नाम की कंपनी है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।