Viral News: आज के डिजिटल दौर में लोग हर छोटी-बड़ी जानकारी के लिए इंटरनेट और YouTube का सहारा लेते हैं। हालांकि, कई बार यही जानकारी गलत फैसलों की वजह भी बन सकती है। ऐसा ही एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां एक गर्भवती महिला ने अस्पताल जाने के बजाय घर पर ही प्राकृतिक प्रसव (Natural Birth) कराने का फैसला किया। बताया जा रहा है, कि इस दौरान YouTube वीडियो को गाइड की तरह इस्तेमाल किया गया। लेकिन प्रसव के बाद हुई गंभीर मुश्किलों ने महिला की जान ले ली।
दूसरे बच्चे के जन्म की तैयारी कर रहा था परिवार-
मृतक महिला की पहचान ससिकला के रूप में हुई है, जो उथुकुली के पास थलवायपालयम इलाके में अपने पति कार्तिक के साथ रहती थीं। दंपति की पहले से एक चार साल की बेटी है और ससिकला दूसरी बार मां बनने वाली थीं। परिवार ने इस बार अस्पताल में डिलीवरी कराने के बजाय घर पर ही प्राकृतिक तरीके से बच्चे को जन्म दिलाने का फैसला किया था। परिवार को उम्मीद थी, कि सब कुछ नॉर्मल रहेगा। लेकिन हालात जल्द ही बिगड़ गए।
बच्ची का जन्म हुआ-
24 जून को ससिकला ने घर पर एक बच्ची को जन्म दिया। शुरुआत में सब कुछ नॉर्मल लग रहा था, लेकिन प्रसव के कुछ ही समय बाद उन्हें बहुत ज्यादा बिल्डिंग (Postpartum Bleeding) होने लगी, जिससे स्थिति गंभीर होती गई।
परिजनों ने जब हालत बिगड़ती देखी, तो उन्हें तुरंत पेरुंदुरई स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर देखते हुए इलाज शुरू किया। हालांकि, हालत में सुधार न होने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए कोयंबटूर के एक प्राइवेट अस्पताल में रेफर किया गया।
इलाज के दौरान हुई मौत
कई कोशिशों के बावजूद डॉक्टर ससिकला की जान नहीं बचा सके। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। नवजात बच्ची के जन्म की खुशी कुछ ही घंटों में मातम में बदल गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और चार साल की बेटी समेत दोनों बच्चियां अब अपनी मां के साये से वंचित हो गई हैं।
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स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने शुरू की जांच-
घटना के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रसव के दौरान किस तरह की व्यवस्था की गई थी और क्या किसी प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की मदद ली गई थी या नहीं। वहीं उथुकुली पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।
गर्भावस्था और प्रसव बेहद संवेदनशील मेडिकल प्रक्रियाएं हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी जागरूकता बढ़ा सकती है, लेकिन वह डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की जगह नहीं ले सकती। समय पर इलास या मदद न मिलने से कई बार ऐसी दुखद घटनाएं हो सकती हैं।
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