Delhi Floating Solar Project: दिल्ली में अब बिजली बनाने का तरीका बदलने वाला है। छतों पर सोलर पैनल लगाने के बाद अब सरकार एक कदम आगे बढ़ते हुए झीलों, तालाबों और जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाने की तैयारी कर रही है। यह पहली बार होगा, जब राजधानी में इस तरह का इनोवेटिव प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, जिससे साफ और सस्ती बिजली पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।
बावाना झील से होगी शुरुआत-
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली की बवाना लेक से की जाएगी। यहां पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर फ्लोटिंग सोलर पैनल लगाए जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक, इस झील का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां पहले से एक बड़ा पावर प्लांट मौजूद है और सरकारी मंजूरी लेना भी रिलेटिवली आसान होगा। अगर यह पायलट सफल रहता है, तो आगे चलकर इसे यमुना के वजीराबाद जैसे अन्य जल स्रोतों तक भी बढ़ाया जा सकता है।
कैसे काम करेगा यह फ्लोटिंग सोलर सिस्टम-
इस प्रोजेक्ट में सबसे पहले पानी की सतह पर फ्लोटर्स लगाए जाएंगे, जिन पर सोलर पैनल फिट किए जाएंगे। इन पैनलों से बनने वाली बिजली को ट्रांसफॉर्मर के जरिए ग्रिड में भेजा जाएगा, जहां से इसे जरूरत के हिसाब से सप्लाई किया जाएगा।दिलचस्प बात यह है, कि इन जलाशयों में रोहिणी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीटेड पानी भी लाया जाएगा, जिससे सिस्टम को लगातार पानी की सप्लाई मिलती रहे और बिजली उत्पादन में कोई रुकावट न आए।
सस्ती और ज्यादा असरदार तकनीक-
अधिकारियों का कहना है कि फ्लोटिंग सोलर पैनल पारंपरिक रूफटॉप सोलर से ज्यादा एफिशिएंड और कॉस्ट-इफैक्टिव होते हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट की लागत करीब 5 से 6 करोड़ रुपये आंकी गई है, हालांकि टेंडर प्रक्रिया के बाद ही सटीक खर्च सामने आएगा। बावाना झील पर लगने वाले पैनल से करीब 1 मेगावाट बिजली पैदा होने की उम्मीद है, जिसे पास के बड़े पावर प्लांट की जरूरतों को पूरा करने में इस्तेमाल किया जाएगा।
दिल्ली के सोलर टारगेट को मिलेगी रफ्तार
फिलहाल दिल्ली में करीब 431 मेगावाट बिजली सोलर पैनलों से बन रही है, लेकिन सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक इसे बढ़ाकर 4,500 मेगावाट करना है। इसके लिए लोगों को सोलर पैनल लगाने पर सब्सिडी भी दी जा रही है। ऐसे में फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट इस लक्ष्य को हासिल करने में एक बड़ा रोल निभा सकता है और दिल्ली को साफ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा सकता है।
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पहले भी आया था प्लान-
गौर करने वाली बात यह है, कि इससे पहले 2022 में भी फ्लोटिंग सोलर का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन वह जमीन पर नहीं उतर पाया। इस बार सरकार ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने का फैसला किया है और जल्द ही टेंडर जारी कर काम शुरू किया जाएगा। कुल मिलाकर, दिल्ली में बिजली उत्पादन का यह नया तरीका न सिर्फ पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि आने वाले समय में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में भी मददगार साबित हो सकता है।
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