Delhi Pollution: दिल्ली की हवा को साफ़ करने के लिए सरकार अब एक नया तरीका आज़मा रही है। इस बार काम निजी कंपनियों को सौंपा जाएगा और भुगतान भी नतीजे देखकर ही होगा। शहर के 40 अलग-अलग इलाकों में हवा साफ़ करने के लिए 104 करोड़ रुपये की योजना बनी है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये योजना क्या है और इसमें क्या पेच है।
योजना की सबसे बड़ी शर्त क्या है?
अंग्रेज़ी समाचार वेबसाइट एनडीटीवी के मुताबिरक, कंपनियों को पैसा तभी मिलेगा, जब उनकी मशीनें PM2.5 और PM10 दोनों में कम से कम 20% की कमी लाएँगी। PM2.5 और PM10 हवा में तैरते बहुत बारीक कण होते हैं, जो साँस के ज़रिए शरीर में पहुँचकर सेहत को नुकसान पहुँचाते हैं और दिल्ली की हवा को खतरनाक बनाते हैं।
भुगतान का हिसाब कुछ ऐसे लगेगा:-
- जिस दिन दोनों कण 20% तक कम होंगे, वही दिन भुगतान के लिए गिना जाएगा।
- अगर किसी एक में भी कमी कम रही, तो उस दिन का पैसा नहीं मिलेगा।
- हर महीने ऐसे दिनों को जोड़कर पेमेंट तय होगा।
- लगातार दो महीने लक्ष्य पूरा न होने पर कॉन्ट्रैक्ट छिन सकता है, लेकिन इससे पहले कंपनी को नोटिस और जवाब देने का मौका मिलेगा।
पहले क्या-क्या आज़माया जा चुका है? (Delhi Pollution)
दिल्ली में ये पहला प्रयोग नहीं है। इससे पहले कई जगहों पर बाहर लगने वाले एयर प्यूरीफायर परखे गए:
- 2023: आनंद विहार बस टर्मिनल
- 2024: खान मार्केट के पास ताज एम्बेसडर होटल के बाहर और न्यू मोती बाग
- जनवरी 2025: जंगपुरा का एक पेट्रोल पंप
इन प्रयोगों में Umeandus Technologies नाम की निजी कंपनी की तकनीक इस्तेमाल हुई। पिछले साल नेहरू पार्क में करीब 150 प्यूरीफायर लगाने की योजना भी बनी थी, लेकिन पार्क में आने वाले लोगों की राय के बाद अगस्त में इसे रोक दिया गया। वहाँ कोई मशीन नहीं लगी।
इसी साल मई में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्गुरु राम सिंह मार्ग पर लगे 21 बिना फ़िल्टर वाले प्यूरीफायर देखे। साथ ही पश्चिमी दिल्ली में परखी जा रही दूसरी मशीनों का भी जायज़ा लिया।
पुराने प्रयोगों के नतीजे कैसे रहे? (Delhi Pollution)
आनंद विहार: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के मुताबिक, यहां औसतन PM2.5 में 30% और PM10 में 25% की कमी दर्ज हुई। लेकिन ये असर सिर्फ उसी जगह के आसपास दिखा, पूरे इलाके में नहीं।
कनॉट प्लेस का स्मॉग टावर (2021): यहाँ नतीजे उतने अच्छे नहीं रहे। दिल्ली के आर्थिक सर्वे 2025-26 के आँकड़े देखिए:
- टावर से 20 मीटर के भीतर: PM2.5 में 48% और PM10 में 56% की कमी
- 100 से 199 मीटर पर: कमी घटकर 12% और 13% रह गई
- 500 मीटर से आगे: कोई कमी दर्ज नहीं हुई
एक संसदीय रिपोर्ट में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की राय भी दर्ज है, कि भविष्य की आउटडोर हवा साफ़ करने वाली परियोजनाओं में स्मॉग टावर पर विचार नहीं होना चाहिए। नई योजना में स्मॉग टावर ज़रूरी नहीं है, पर दिलचस्प बात ये है कि जिस बाबा खड़क सिंह मार्ग पर ये टावर खड़ा है, वो जगह नई सूची में शामिल है।
नई योजना कैसे काम करेगी? (Delhi Pollution)
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने पूरे प्रोजेक्ट को 40 पैकेज में बाँटा है। हर पैकेज की अनुमानित लागत 2.6 करोड़ रुपये है।
- हर जगह के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली योग्य कंपनी चुनी जाएगी।
- एक कंपनी को ज़्यादा से ज़्यादा 10 जगहों का काम मिल सकेगा।
- हर जगह का दायरा करीब 1 से 1.5 एकड़ होगा।
- जगहों में कनॉट प्लेस, खान मार्केट, चाँदनी चौक, डिफेंस कॉलोनी, बड़े बस अड्डे, अस्पताल, पर्यटन स्थल और दिल्ली यूनिवर्सिटी का नॉर्थ कैंपस शामिल हैं।
- कंपनियाँ अपनी पसंद की तकनीक दे सकती हैं, बस सुरक्षा जाँच पास करनी होगी।
- मशीन लगाने के लिए चार हफ़्ते मिलेंगे, और चलाने व मरम्मत का खर्च भी कंपनी को ही उठाना होगा।
एक बात ध्यान देने की है। टेंडर में इस काम को “एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग” कहा गया है, जबकि DPCC के सार्वजनिक नोटिस में असली मकसद प्रदूषण घटाना बताया गया है।
असली परीक्षा मशीन लगने के बाद-
एक स्वतंत्र एजेंसी मशीन वाले इलाके के अंदर और बाहर की हवा की तुलना करेगी। इसी तुलना से तय होगा कि 20% का लक्ष्य पूरा हुआ या नहीं।
कॉन्ट्रैक्ट पहले एक साल के लिए होगा। उसे दो बार, एक-एक साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए मंज़ूरी चाहिए और पिछले साल में कम से कम 300 दिन का सफल प्रदर्शन ज़रूरी है।
कौन-सी कंपनियां आवेदन कर सकती हैं?
- टर्नओवर: सालाना औसतन कम से कम 1 करोड़ रुपये।
- अनुभव: तीन पूरे हो चुके मिलते-जुलते प्रोजेक्ट (हर एक अनुमानित लागत के 40% के बराबर), या दो प्रोजेक्ट (50% के बराबर), या एक प्रोजेक्ट (80% के बराबर)।
- स्टार्टअप: सरकार से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप छूट माँग सकते हैं। सूक्ष्म और लघु उद्योगों को खरीद में कोई तरजीह नहीं मिलेगी।
- बिड सिक्योरिटी: हर जगह के लिए 5 लाख रुपये, छूट वालों को छोड़कर।
- परफॉर्मेंस गारंटी: जीतने वाली कंपनी को 3% की बैंक गारंटी देनी होगी, जो 14 महीने तक मान्य रहेगी।
- भुगतान: सेवा मंज़ूर होने और ऑनलाइन बिल जमा होने के 45 दिन के भीतर।
- सरकार कंपनी की सहमति से काम और रकम को 50% तक बढ़ा भी सकती है।
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दिल्ली की ज़हरीली हवा से निपटने के लिए ये योजना एक नया प्रयोग है, जिसमें कंपनियों पर नतीजा दिखाने का सीधा दबाव है। पुराने प्रयोग बताते हैं, कि मशीनें अपने आसपास की हवा तो साफ़ कर सकती हैं, पर पूरे शहर की हवा बदलना बहुत मुश्किल है। अब देखना ये है, कि 40 जगहों पर लगने वाली ये मशीनें 20% के लक्ष्य पर कितनी खरी उतरती हैं।
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