Delhi-Haridwar Expressway: दिल्ली से हरिद्वार का सफ़र जल्द ही सिर्फ़ डेढ़ घंटे में पूरा हो सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को एक CII सम्मेलन में कहा, कि अगला रोड प्रोजेक्ट अगले महीने खुल जाएगा। आइए जानते हैं इस प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल-
Delhi-Haridwar Expressway रूट पर क्या बोले गडकरी?
गडकरी ने भारत के भविष्य के हाइवे स्मार्ट, सुरक्षित और टिकाऊ विषय पर हुए CII राष्ट्रीय सम्मेलन में बताया, कि हाल ही में खुले दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर से दोनों शहरों के बीच का सफ़र सात घंटे से घटकर डेढ़ घंटे रह गया है। अगला प्रोजेक्ट हरिद्वार की कनेक्टिविटी सुधारेगा और उनके मुताबिक दिल्ली से हरिद्वार का रास्ता अगले महीने खोला जाएगा।
चारधाम यात्रा पर ट्रैफ़िक तीन गुना-
गडकरी ने कहा, कि चारधाम सड़क परियोजना का 80 से 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। उनके मुताबिक, दिल्ली से बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाला ट्रैफ़िक तीन गुना बढ़ गया है। उन्होंने अयोध्या और महाराष्ट्र में पंढरपुर पालकी मार्ग जैसे प्रोजेक्ट का भी ज़िक्र किया, जो तीर्थयात्रियों के सफ़र को आसान बनाते हैं। उन्होंने कहा, कि पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर समेत देश के हर हिस्से में सुरंगें, सड़कें और पुल बनाए जा रहे हैं।
Delhi-Haridwar Expressway पर्यटन और रोज़गार-
गडकरी के मुताबिक, बेहतर सड़कों से धार्मिक स्थलों पर आने वालों की संख्या बढ़ रही है और पर्यटन में रोज़गार के मौके बन रहे हैं। उन्होंने बताया, कि सरकार के पास धार्मिक पर्यटन से जुड़े 1 लाख करोड़ रुपये और सुरंग प्रोजेक्ट के 2 लाख करोड़ रुपये के काम हैं।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से किसे फ़ायदा?
ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेसवे उन ज़िलों को जोड़ेंगे, जिन्हें विकास का कम फ़ायदा मिला है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे ग्रामीण, आकांक्षी और आदिवासी ज़िलों को आर्थिक केंद्रों से जोड़ेगा:-
- हरियाणा: आकांक्षी ज़िलों को फ़ायदा
- राजस्थान: अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर और बूंदी
- मध्य प्रदेश: आदिवासी ज़िले रतलाम और झाबुआ
- गुजरात: दाहोद
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100 रुपये खर्च, 325 रुपये का असर-
गडकरी ने कहा, कि सड़क बनने के दौरान रोज़गार मिलता है और सीमेंट, स्टील और मशीनरी की मांग बढ़ती है। बाद में कनेक्टिविटी से व्यापार, यात्रा और परिवहन आसान होता है, लागत घटती है और उद्योग, पर्यटन और शहरों को फ़ायदा होता है। उनके मुताबिक, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए गए हर 100 रुपये से अर्थव्यवस्था पर 325 रुपये का असर पड़ता है। उन्होंने सड़क निर्माण, एक्सप्रेसवे और ग्रीन एक्सप्रेस हाइवे को सरकार की प्राथमिकता बताया।
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