Om Birla
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    Om Birla: गोवा में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ यानी CPA के इंडिया रीजन ज़ोन-VII सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा, कि संसद में हर सदस्य की बात सुनी जाए, चाहे उसकी विचारधारा कोई भी हो, यह उनका प्रयास भी है और ज़िम्मेदारी भी। उनकी यह बात उस वक्त और भी मायने रखती है, जब देश में संसदीय बहसों की गुणवत्ता और सार्थकता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं।

    हर विधेयक पर तय समय से ज़्यादा हुई चर्चा-

    ओम बिरला ने बताया, कि संसद सत्र के दौरान बहसें देर रात तक चलती रहीं और हर विधेयक पर निर्धारित समय से अधिक चर्चा हुई। उन्होंने कहा, कि अलग-अलग विचारधाराओं के सदस्यों के मत भले ही अलग हों, लेकिन यह सुनिश्चित करना, कि हर किसी की सोच और नज़रिया सदन में सुना जाए, यही एक अध्यक्ष का असली धर्म है। उन्होंने यह भी जोड़ा, कि निष्पक्ष और न्यायसंगत रहना उनका व्यक्तिगत प्रयास तो है ही, अध्यक्ष पद की मांग भी यही है।

    युवाओं से अपील-

    सम्मेलन के समापन सत्र में बिरला ने युवाओं को सीधे संबोधित किया। उन्होंने कहा, कि लोकतंत्र तभी मज़बूत होता है जब युवा पीढ़ी उसमें सक्रिय भागीदारी निभाए। शासन को पारदर्शी, जनकेंद्रित और जवाबदेह बनाने में युवाओं की भूमिका अहम है और उन्हें इस दिशा में आगे आना चाहिए। यह बात आज के दौर में और भी प्रासंगिक है जब देश की आधी से ज़्यादा आबादी युवा है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़े-

    बिरला ने महिलाओं की संसदीय भागीदारी पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, कि भारतीय महिलाएं व्यापार, शिक्षा और विज्ञान समेत हर क्षेत्र में आगे हैं, इसलिए नीति निर्माण और क़ानून बनाने की प्रक्रिया में भी उनकी हिस्सेदारी उनके योगदान के अनुपात में होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से शासन में संवेदनशीलता आएगी और नीतियां समाज की ज़रूरतों के ज़्यादा करीब होंगी।

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    गोवा के राज्यपाल ने भी उठाई संसदीय उत्पादकता की बात-

    समापन सत्र में गोवा के राज्यपाल पुसापति अशोक गजपति राजू ने कहा कि विधायी संस्थाएँ नीति-निर्माण और जन-जवाबदेही का जीवंत मंच होनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि बार-बार होने वाले व्यवधान और कम बैठकें सार्थक बहस के अवसर छीन लेती हैं। उन्होंने विपक्ष की भूमिका को भी रेखांकित करते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक ढाँचे का एक ज़रूरी हिस्सा है और इस सच्चाई को हमेशा याद रखा जाना चाहिए।

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    By sumit

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