J&k Deputy CM: जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री और खनन मंत्री सुरिंदर चौधरी उस वक्त हैरान रह गए, जब वह अचानक खनन निदेशालय पहुंचे और वहां उन्हीं अधिकारियों को काम करते देखा, जिन्हें उन्होंने गंभीर आरोपों के चलते पहले ही निलंबित या तबादला कर दिया था। यह देखकर वे भड़क उठे और मीडिया के सामने खुलकर बोले। उन्होंने खनन निदेशालय को “मछली बाज़ार” और “अवैध खनन का अड्डा” तक कह डाला, यह बयान अपने आप में बता देता है, कि हालात कितने बिगड़े हुए हैं।
न निदेशक मिले, न संयुक्त निदेशक-
जब चौधरी दफ्तर पहुंचे, तो वहां न तो निदेशक थे और न ही संयुक्त निदेशक दोनों मुख्य सचिव के साथ बैठक में गए हुए थे। लेकिन जो अधिकारी निलंबित हो चुके थे, वे आराम से अपनी कुर्सियों पर बैठे मिले। चौधरी ने कहा, कि वे सचिवालय जाकर निदेशक और संयुक्त निदेशक से यह जवाब मांगेंगे, कि आखिर ऐसे अधिकारी अभी भी विभाग में कैसे काम कर रहे हैं।
“अवैध खनन को अंदर से मिल रहा है बढ़ावा”-
उपमुख्यमंत्री ने सीधे आरोप लगाया, कि जम्मू के खनन निदेशालय के भीतर से ही अवैध खनन को प्रोत्साहन और संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, कि जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, वे दूसरे रास्तों से दबाव बनाकर वापस आ जाते हैं। चौधरी ने यह भी स्वीकार किया, कि जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश होने की वजह से प्रशासनिक चुनौतियां ज़्यादा हैं और कुछ लोग इस स्थिति का फायदा उठाकर जवाबदेही से बचने की कोशिश करते हैं। लेकिन उन्होंने साफ़ चेतावनी दी, “यह ज़्यादा दिन नहीं चलेगा, गलत काम करने वालों को इसकी क़ीमत चुकानी होगी।”
पहले भी उठ चुके हैं सवाल, ACB कर चुका है छापे-
यह पहली बार नहीं है, जब खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर उंगली उठी हो। फरवरी में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ACB ने जम्मू के बजाल्टा, कठुआ के गंडयाल, राजौरी के कल्लर और डूंगी तथा रियासी ज़िले के अंजी और अरनास में कई स्टोन क्रशर और खनन ब्लॉक पर छापे मारे थे। जांच में सामने आया, कि अधिकांश स्टोन क्रशर और ब्लॉक धारक नियमों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए अवैध खनन में लिप्त थे, जिससे उन इलाकों में पर्यावरण को गंभीर और अपूरणीय नुकसान पहुंच रहा था।
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जांच के आदेश-
उपमुख्यमंत्री की इस सख्त प्रतिक्रिया के बाद विभाग में हलचल मच गई है। जांच के आदेश दिए जा चुके हैं और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटक रही है। देखना यह होगा कि यह सख्ती केवल बयानों तक सीमित रहती है या ज़मीन पर भी बदलाव दिखता है।
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