Karnataka Food Security
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    Karnataka Food Security: कर्नाटक का खाद्य सुरक्षा और दवा प्रशासन विभाग राज्य भर में दवाओं और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के लिए बड़े कदम उठा रहा है। विभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ और प्रभावी दवाएं मिलें। फरवरी और मार्च 2025 के बीच, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने परीक्षण के लिए हजारों खाद्य नमूने एकत्र किए हैं, जिससे राज्य भर में खाद्य सुरक्षा की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार देखा जा रहा है।

    जांच से चौंकाने वाले परिणाम(Karnataka Food Security)-

    फरवरी 2025 के दौरान, विभाग ने 3,698 खाद्य नमूनों का विश्लेषण किया, जिनमें 296 पीने के पानी की बोतलें शामिल थीं। इन नमूनों से प्राप्त परिणाम चिंताजनक रहे। केवल 72 पानी के नमूने सुरक्षित पाए गए, जबकि 95 असुरक्षित और 88 घटिया गुणवत्ता के थे। यह आंकड़े बताते हैं कि बाजार में उपलब्ध बोतलबंद पानी की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। “हमारा मुख्य लक्ष्य जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा है,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया। “पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता में मिलावट बर्दाश्त नहीं की जा सकती।”

    घी और पनीर के नमूनों की जांच जारी(Karnataka Food Security)-

    मार्च में, विभाग ने लगभग 3,204 खाद्य नमूनों का परीक्षण किया, जिनमें 49 घी के नमूने और 231 पनीर के नमूने शामिल थे। घी के 6 नमूने सुरक्षित पाए गए, जबकि शेष का परीक्षण अभी जारी है। पनीर के संबंध में, अब तक परीक्षित 32 नमूनों में से, 2 असुरक्षित और 30 सुरक्षित घोषित किए गए हैं। विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “पनीर जैसे रोज़मर्रा के इस्तेमाल में आने वाले डेयरी प्रोडक्ट्स की क्वालिटी कंट्रोल बहुत जरूरी है। इसमें मिलावट होने से लोगों का स्वास्थ्य सीधे प्रभावित होता है।”

    होटल और रेस्तरां में स्वच्छता की जांच-

    सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए, 590 होटल और रेस्तरां में कीट नियंत्रण जांच की गई। मानकों को पूरा न करने वाले 214 होटलों को नोटिस जारी किए गए। गंभीर मुद्दों के लिए 11 होटलों से 1.15 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके अलावा, 92 खाद्य इकाइयों और रेस्तरां को चेतावनी दी गई, और अन्य उल्लंघनों के लिए 1.53 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। “हमने देखा कि असुरक्षित तली हुई मटर, मिठाईयां और पनीर सबसे आम समस्याएं हैं,” एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया। “ये आम खाद्य पदार्थ हैं जो हर घर में पहुंचते हैं, इसलिए इनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।”

    दवा सुरक्षा में महत्वपूर्ण कदम-

    दवा सुरक्षा के मोर्चे पर, मार्च 2025 तक 1,891 दवा नमूनों का परीक्षण किया गया। इनमें से 41 घटिया पाए गए। विभाग ने इसमें शामिल कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की, विशेष रूप से 78 दोषपूर्ण रिंगर लैक्टेट सॉल्यूशन के मामले में। बाजार से 24 लाख रुपये से अधिक मूल्य की घटिया गुणवत्ता वाली दवाएं वापस मंगवाई गईं। “हमारा उद्देश्य न केवल दोषपूर्ण दवाओं को बाजार से हटाना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि ऐसी दवाएं पहले स्थान पर बाजार में आएं ही नहीं,” एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया।

    विभाग घटिया गुणवत्ता वाली दवाओं का जल्दी से पता लगाने और उन्हें वापस मंगाने के लिए सॉफ्टवेयर भी विकसित कर रहा है। यह सिस्टम दवा आपूर्ति श्रृंखला को डिजिटल रूप से ट्रैक करेगा, जिससे किसी भी समस्याग्रस्त बैच को तुरंत पहचाना और वापस मंगाया जा सकेगा।

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    जागरूकता अभियान से दिख रहे सकारात्मक परिणाम-

    बेकरी उत्पादों में हानिकारक कृत्रिम रंगों के बारे में जागरूकता अभियान अच्छे परिणाम दिखा रहे हैं। असुरक्षित नमूनों की संख्या अगस्त 2024 में 4.06 प्रतिशत से घटकर जनवरी 2025 तक 1.16 प्रतिशत हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जागरूकता अभियान और नियमित निरीक्षण का सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। “लोगों को अब पता है कि क्या देखना है और किन चीजों से बचना है,” एक स्थानीय बेकरी मालिक ने कहा, जिन्होंने अपने उत्पादों में कृत्रिम रंगों के उपयोग को बंद कर दिया है। “ग्राहक अब हमारी मिठाइयों के प्राकृतिक रंग को पसंद करते हैं, भले ही वे कुछ कम चमकीले हों।”

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।