Japan and Singapore City India: उत्तर प्रदेश में एक ऐसा सपना आकार लेने की कोशिश में है, जो कुछ साल पहले तक शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी YEIDA ने राज्य सरकार के सामने एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव रखा है, ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे दो नए शहर बसाने का। इन्हें नाम दिया गया है, जापान सिटी और सिंगापुर सिटी। अगर सरकार की मुहर लग गई, तो यह पूरा इलाका देश के सबसे आधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में से एक बन सकता है।
क्या है पूरा प्रस्ताव?
YEIDA ने राज्य के अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त को एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है। इसके तहत ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 5A में जापान सिटी के लिए 500 एकड़ और सेक्टर 7 में सिंगापुर के लिए 500 एकड़ ज़मीन चिन्हित की गई है। YEIDA के CEO राकेश कुमार सिंह ने बताया, कि दोनों परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की योजना भी तैयार कर ली गई है और यह ज़मीन प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में ही आती है।
इन शहरों में क्या होगा खास?
इन दोनों प्रस्तावित शहरों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी, कि ये सिर्फ कारखानों का इलाका नहीं होंगे, बल्कि पूरी तरह से एकीकृत टाउनशिप के रूप में विकसित किए जाएंगे। आवंटित ज़मीन का करीब 70 फीसदी हिस्सा उद्योगों के लिए रखा जाएगा, जबकि बाकी हिस्से में आवासीय, व्यावसायिक और संस्थागत सुविधाएं भी होंगी। राकेश कुमार सिंह के मुताबिक, “इन सेक्टरों को एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप के रूप में विकसित किया जा सकता है।”
जापान-सिंगापुर यात्रा से है सीधा जुड़ाव-
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 23 से 26 फरवरी तक जापान और सिंगापुर की चार दिवसीय यात्रा पर हैं। इस दौरे का मकसद उत्तर प्रदेश को भारत का मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में दुनिया के सामने पेश करना है। सिंगापुर में 23-24 फरवरी और जापान में 25-26 फरवरी को वे Google, Toshiba और Suzuki Motors जैसी बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। डाटा सेंटर, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि व्यवसाय और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में निवेश के मौकों पर भी बातचीत होगी।
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उत्तर प्रदेश के लिए क्यों अहम है यह कदम?
अगर यह प्रस्ताव ज़मीन पर उतरता है, तो यमुना एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा न सिर्फ रोज़गार के नए अवसर लाएगा, बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण बनेगा। जापान सिटी और सिंगापुर सिटी जैसे नाम सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं हैं, ये उस सोच को दर्शाते हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश खुद को एशिया के सबसे विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा देखना चाहता है।
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