Delhi Earthquake: जापान में हाल ही में आए बड़े भूकंप के बाद भारत में भी लोग डरे हुए हैं। खासकर दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या यहां भी कभी बड़ा भूकंप आ सकता है। अच्छी बात यह है, कि अब तक दिल्ली में कोई बहुत बड़ा खतरनाक भूकंप नहीं आया है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है, कि यहां की जमीन और भूगोल ऐसा है, जो भूकंप के लिए सेंसिटिविटी है।
दिल्ली में भूकंप क्यों आ सकता है-
दिल्ली की जमीन के नीचे कई फॉल्ट लाइन्स यानी दरारें हैं। ये वो जगहें हैं जहां धरती की बड़ी-बड़ी प्लेटें आपस में मिलती हैं और हिलती-डुलती रहती हैं। दिल्ली के पास तीन बड़ी फॉल्ट लाइन्स हैं – दिल्ली-मुरादाबाद वाली, मथुरा वाली और सोहना वाली। इन तीनों के अलावा कई छोटी दरारें भी हैं। इसी वजह से दिल्ली-NCR में भूकंप आने की संभावना ज्यादा रहती है।

दिल्ली की बनावट भी थोड़ी कॉम्प्लीकेटिड हैं। एक तरफ अरावली की पहाड़ियां हैं, तो दूसरी तरफ यमुना नदी का मैदान है। यमुना के किनारे वाले इलाकों में नरम रेत और मिट्टी की मोटी लेयर्स हैं। यहां पानी भी जमीन के काफी करीब मिलता है। जब ऐसी जगहों पर भूकंप आता है, तो झटके बहुत तेज महसूस होते हैं और नुकसान भी ज्यादा होता है।
यह प्रोबलम सिर्फ दिल्ली की नहीं है। उत्तर भारत का पूरा मैदानी इलाका, जिसे इंडो-Gangetic Plain कहते हैं, इसी तरह का है। यह सात लाख स्कवेयर किलोमीटर में फैला है और गंगा नदी की मिट्टी से बना है। यह पूरा इलाका हिमालय के नीचे है, जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। इसलिए यहां के सभी बड़े शहरों को हाई-रिस्क एरिया माना जाता है।
क्या जल्दी आने वाला है बड़ा भूकंप-

Symbolic Photo Source - Googleयह बताना मुश्किल है, कि भूकंप कब आएगा, क्योंकि यह पूरी तरह नोचुरल प्रोसेस है। अच्छी बात यह है, कि दिल्ली में अब तक बड़ी तबाही नहीं हुई है। 29 अगस्त 1960 को दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर 4.8 की तीव्रता का भूकंप आया था। इससे कुछ इमारतों को नुकसान हुआ था लेकिन कोई बड़ी ट्रेजडी नहीं हुई। समय-समय पर छोटे झटके आते रहते हैं, पर कोई बहुत बड़ा भूकंप अभी तक नहीं आया। लेकिन अगर कभी उत्तर भारत में बड़ा भूकंप आता है तो दिल्ली की जमीन की बनावट की वजह से यहां नुकसान ज्यादा हो सकता है।
सरकार ने बनाए नए सेफ्टी रुल्स-
भारत सरकार ने भूकंप से बचाव के लिए मजबूत नियम बनाए हैं। Bureau of Indian Standards ने इस साल नया IS 1893 code जारी किया है, जो पूरे देश में जरूरी है। सबसे बड़ी बात यह है, कि अब एक नया Zone VI बनाया गया है, जो सबसे खतरनाक ज़ोन है। इसमें पूरे हिमालय के इलाके को रखा गया है।
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IIT मद्रास के प्रोफेसर सुभदिप बनर्जी ने बताया, कि नए कोड का मकसद एक्सट्रा सेफ्टी देना है। अब भारत को पांच ज़ोन्स में बांटा गया है – Zone II सबसे कम खतरनाक है और Zone VI सबसे ज्यादा खतरनाक। दिल्ली अभी भी Zone IV में है, जो हाई-रिस्क है। UP के बुलंदशहर, देवरिया, गाजियाबाद, गोरखपुर जैसे शहर भी इसी ज़ोन में आते हैं। नए Zone VI में गुवाहाटी, इंफाल, कोहिमा जैसे नॉर्थइस्ट के शहर हैं।
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नए नियमों में एक खास चीज का ध्यान रखा गया है – liquefaction। यह वो प्रोसेस है, जब भूकंप के समय मिट्टी पानी जैसी हो जाती है। प्रोफेसर बनर्जी ने कहा, कि Indo-Gangetic Plain में यह खतरा बहुत ज्यादा है. क्योंकि यहां गहरी मिट्टी है, पानी ऊपर है और रेतीली मिट्टी है। अब हर नई बिलडिंग की जांच करना जरूरी कर दिया गया है। अच्छी बात यह है, कि इंजिनियर जानते हैं, कि खतरनाक इलाकों में भी सेफ बिल्डिंग्स कैसे बनाई जाएं।



