Delhi Court Black Magic: दिल्ली की एक अदालत में 11 अगस्त को एक ऐसी घटना हुई, जिसने सभी को हैरान कर दिया। कार्यवाही के दौरान एक सर्जन ने अचानक कोर्ट रूम के फर्श पर चावल फेंक दिए। इस अजीबोगरीब हरकत को देखकर वकीलों और कोर्ट स्टाफ के मन में काले जादू की आशंका पैदा हो गई। मामला इतना गंभीर हो गया, कि जज को तुरंत कार्यवाही रोककर सफाई करानी पड़ी। यह घटना अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बर्नाला टंडन की अदालत में हुई। डॉक्टर चंदर विभास नाम के इस सर्जन की हरकत ने पूरे कोर्ट रूम में अफरा तफरी मचा दी।
कोर्ट रूम में मचा हुआ था भगदड़-
जब डॉ चंदर विभास ने जानबूझकर कोर्ट रूम के फर्श पर चावल के दाने बिखेरे, तो मौजूद वकीलों और कोर्ट स्टाफ में घबराहट फैल गई। सभी लोगों के मन में यह डर बैठ गया, कि कहीं यह कोई काला जादू तो नहीं है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई, कि वकीलों ने तुरंत जज से अनुरोध किया, कि चावल के दानों की तुरंत सफाई कराई जाए।
जज शेफाली बर्नाला टंडन ने तुरंत आरोपी को चावल के दाने उठाने का आदेश दिया और सफाई कर्मचारी को बुलवाकर पूरे कोर्ट रूम की सफाई कराई। इस पूरी घटना के कारण अदालती कार्यवाही लगभग 15 से 20 मिनट तक रुकी रही। जब तक कि सारे चावल के दाने साफ नहीं हो गए, तब तक वकील ने मंच के पास आने से हिचकिचा रहे थे।
आरोपी ने घुटनों के बल मांगी माफी-
जब जज ने डॉ विभास से इस अजीब हरकत के बारे में पूछा, तो वह घुटनों के बल बैठकर अपनी गलती के लिए माफी मांगने लगा। उसके वकील ने भी पहले तो वर्चुअली सुनवाई में भाग लिया था, लेकिन बाद में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समय मांगा।
जज ने दी कड़ी फटकार और सजा-
बाद में सुनवाई फिर से शुरू करते समय जज शेफाली टंडन ने इस घटना पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, कि इस हरकत से न सिर्फ न्यायिक कार्यवाही में बाधा आई है। बल्कि अदालत की गरिमा भी गिरी है। जज ने साफ शब्दों में कहा, कि अदालत वह जगह है जहां न्याय मांगा और दिया जाता है और इसकी मर्यादा बनाए रखना कानून के राज के लिए जरूरी है।
न्यायाधीश ने यह भी कहा, कि ऐसे व्यवहार से समाज में गलत संदेश जाता है। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता की धारा 267 का हवाला देते हुए बताया, कि अदालत को किसी भी जानबूझकर किए गए अपमान या कार्यवाही में बाधा डालने के लिए सजा देने का अधिकार है।
अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कानून-
जज ने महाराष्ट्र मानव बलि निवारण और उन्मूलन तथा अन्य अमानवीय, दुष्ट और अघोरी प्रथाओं और काला जादू अधिनियम का भी जिक्र किया। उन्होंने जोर देकर कहा, कि समाज को ऐसी बुरी और शैतानी प्रथाओं से बचाना जरूरी है, जो अज्ञानता पर पनपती हैं।
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माफी मांगने पर मिली हल्की सजा-
आरोपी की माफी और भविष्य में ऐसी हरकत न करने के वादे को देखते हुए, अदालत ने उसे प्रतीकात्मक सजा दी। डॉ विभास को कोर्ट की कार्यवाही समाप्त होने तक जेल भेजा गया और 2,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया।
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