Bangalore Road Cleaning
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    Bangalore Road Cleaning: पूरे शनिवार को सड़क साफ करने में झोंक दिया। बेंगलुरु के बालागेरे, पनाथुर और वर्थुर इलाके के रेज़िडेंट ने अपने हाथों में झाड़ू-बेलचे उठाए और अथॉरिटिज़ की लापरवाही के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया। करीब 30 से 40 वॉलैंटियर्स ने मिलकर बालागेरे टी-जंक्शन से लेकर वर्थुर पुलिस स्टेशन तक की 100 मीटर की सड़क को साफ किया। हैरानी की बात यह है, कि सिर्फ इतनी छोटी सी स्ट्रैच से एक पूरा ट्रैक्टर भरकर गाद निकाली गई।

    क्यों उतरे सड़कों पर रैसिडेंट?

    ईस्ट बेंगलुरु की इन सड़कों पर सालों से जमी धूल और गंदगी ने लोगों की जिंदगी दूभर कर दी थी। हर रोज यहां से गुजरने वाली गाड़ियां धूल के बादल उड़ा देती थीं, जिससे सांस की बीमारियां और एलर्जी की समस्याएं बढ़ती जा रही थीं। जब सिविक एजेंसी ने कोई ध्यान नहीं दिया, तो रैज़िडेंट ने क्राउडफंडिंग के जरिए पैसे इकट्ठा किए और ट्रैक्टर व सफाई का सामान किराए पर लिया। सुबह जल्दी इकट्ठा होकर इन लोगों ने तीन घंटे तक लगातार मेहनत की और सड़क की असली हालत दुनिया के सामने रख दी।

    रैज़िडेंट का आरोप कहां हैं सफाई की मशीनें?

    बालागेरे के रैज़िडेंट का कहना है, कि मकैनिकल रोड-स्वीपिंग मशीन, जो आर्टियल और सब-आर्टियल रोड्स को साफ करने के लिए होती हैं, उनके इलाके में महीनों से नहीं आईं। सड़क के किनारों पर गाद की मोटी परतें जम गई हैं, जो व्हीकल के गुजरने से हवा में उड़कर पॉल्यूश़न बढ़ा रही हैं।

    बालागेरे की रैज़िडेंट श्वेता ने बताया, कि इस बारे में कोई ट्रांसपिरैंसी नहीं है, कि स्विपिंग मशीन का इस्तेमाल हो भी रहा है या नहीं। उन्होंने कहा, “हमें यह जानकारी नहीं है, कि नई मंजूर की गई मशीनें कहां हैं या कब ऑपरेशनल होंगी। इस स्ट्रैच पर रोज स्कूल बस रुकती हैं और बच्चों को धूल और गंद में सांस लेनी पड़ती है। जब बेसिक सिविक मेंनटेनेंस ही नहीं हो रही, तो सवाल उठता है, कि टैक्सपेयर का पैसा कहां जा रहा है।”

    एक ट्रैक्टर भर गाद का मतलब क्या है?

    Clean-up drive में हिस्सा लेने वालों का कहना है, कि जितनी गंदगी निकली, वह हैरान करने वाली थी। “सिर्फ 100 मीटर की सड़क से एक ट्रैक्टर भरकर गाद निकली। अगर यह हाल यहां का है, तो पूरे कॉरिडोर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। लगता है, ये सड़कें सालों से नैग्लैक्टिड पड़ी हैं।”

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    सड़क हादसों का बढ़ता खतरा-

    लोगों का कहना है, कि गाद से भरी सड़कों, पॉटहोल्स और टूटी हुई सरफेस की वजह से दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में एक टेक प्रोफेशन के साथ हुए एक्सिडेंट ने लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। अब रेज़िडेंट की मांग है, कि अथॉरिटिज़ तुरंत एक्श़न लें और रैगुलर मेंटेनेंस सुनिश्चित करें, वरना यह सिटिज़न-लेड इनिटेटिव्स ही जारी रहेंगी।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।