1995 Kidnapping Case: 1995 की एक जनवरी की सुबह। 13 साल का संदीप बंसल स्कूल के लिए घर से निकला और फिर कभी नहीं लौटा। उसके पिता एक सीमेंट व्यापारी थे और अगले दिन उन्हें फोन आया, “आपके बेटे का अपहरण हो गया है, 30,000 रुपये दो नहीं तो बच्चा नहीं मिलेगा।” वह बच्चा फिर कभी ज़िंदा नहीं मिला और उसका हत्यारा 31 साल तक पुलिस को चकमा देता रहा। लेकिन शनिवार को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसे उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद के लोनी से गिरफ्तार कर लिया।
मार्शल आर्ट का शिक्षक जो बन गया हत्यारा-
सलीम खान संदीप के स्कूल में मार्शल आर्ट का प्रशिक्षक था। एक गवाह ने बताया था कि संदीप को आखिरी बार उसी के साथ जाते देखा गया था। सलीम के बयान के बाद पुलिस ने मुस्तफाबाद के पास एक नाले में संदीप का शव खोजा जिसे उसके पिता ने पहचाना। सलीम के साथी अनिल ने फरवरी 1995 में आत्मसमर्पण किया और उसके पास से संदीप का घड़ी, स्कूल बैग और टिफिन बॉक्स बरामद हुआ। 1997 में कड़कड़डूमा की अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई।
ज़मानत मिली-
नवंबर 2000 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सलीम को अंतरिम ज़मानत दी। लेकिन वह कभी वापस नहीं आया। 2011 में हाईकोर्ट ने उसकी सज़ा बरकरार रखी लेकिन सलीम तब तक हरियाणा और उत्तर प्रदेश के करनाल, अंबाला जैसे शहरों में अलमारी बनाने का काम करते हुए छुपता-भटकता रहा। करीब 2010 में वह लोनी में बस गया।
खुद को बताया मृत-
लोनी में सलीम ने खुद को “सलीम वास्तिक उर्फ सलीम अहमद” के नाम से पहचान बनाई और चौंकाने वाली बात उसने सरकारी रिकॉर्ड में खुद को मृत घोषित करवा दिया ताकि पुलिस उसे ढूंढ न सके। लोनी में उसने एक कपड़े की दुकान खोली, सामाजिक कार्यकर्ता बन गया और यूट्यूब चैनल भी चलाने लगा।
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फिंगरप्रिंट ने खोला राज़-
फरवरी 2026 में लोनी में दो लोगों ने सलीम पर हमला किया और उसे चाकू मारे। इलाज के दौरान पुलिस के हाथ उसके पुराने रिकॉर्ड लगे। फिंगरप्रिंट और कड़कड़डूमा अदालत के पुराने दस्तावेज़ों से उसकी असली पहचान सामने आई। क्राइम ब्रांच की टीम ने लोनी पुलिस की मदद से ऑपरेशन चलाया और उसे गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया।
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