Mamata Banerjee: भारतीय राजनीति में चुनावी हार के बाद जो आंतरिक उथल-पुथल होती है, उसका सबसे ताज़ा और बड़ा उदाहरण आज तृणमूल कांग्रेस में देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद TMC के भीतर जो बगावत की आंधी चल रही थी वह अब तूफान बन गई है। टाइम्स नाउ के मुताबिक, करीब 20 TMC सांसद पार्टी से बगावत की राह पर हैं और इस बागी गुट की अगुवाई लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। इस गुट ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर NDA को समर्थन देने की इच्छा जताई है, जिसे पार्टी के इतिहास में सबसे बड़ा आंतरिक विद्रोह माना जा रहा है।
सायोनी घोष भी बागी खेमे में-
इस विद्रोह का सबसे चौंकाने वाला नाम है, सायोनी घोष। जादवपुर से लोकसभा सांसद सायोनी को ममता बनर्जी के सबसे मुखर और वफादार समर्थकों में गिना जाता था। वे पार्टी की युवा शाखा की प्रमुख रह चुकी हैं और चुनाव से पहले उन्होंने ममता को भविष्य की प्रधानमंत्री तक कहा था। लेकिन अब खबर है, कि सायोनी ने काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट के दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। वे अभी कोलकाता में नहीं हैं और माना जा रहा है, कि दिल्ली में बागी सांसदों के साथ हैं। सायोनी ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है लेकिन उनका बागी खेमे में शामिल होना TMC के लिए गहरे संकट का संकेत है।
राज्यसभा से भी आए इस्तीफे-
लोकसभा में विद्रोह अभी दावे के स्तर पर है, लेकिन राज्यसभा से इस्तीफे की खबरें पहले ही आ चुकी हैं। 8 जून को TMC के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा, “जनता के इस ऐतिहासिक फैसले को स्वीकार करते हुए मैंने आज राज्यसभा सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया।” उन्होंने TMC शासन में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं का हवाला दिया।
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सुष्मिता देव ने भी दिया इस्तीफा-
इसके बाद राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा अध्यक्ष सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के तुरंत बाद दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से उनकी मुलाकात की तस्वीरें सामने आईं जिसने उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को और हवा दे दी।
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