Petrol Diesel Price Cut: भारत में पिछले कुछ महीनों के दौरान पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों को लेकर आम लोगों को बड़ी राहत मिली, लेकिन इसकी कीमत सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान के रूप में चुकानी पड़ी। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने गुरुवार को बताया, कि 30 जून तक देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचने के कारण करीब 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह नुकसान उस समय हुआ, जब पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और संघर्ष के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक ऊंचाई पर पहुंच गई थीं।
पश्चिम एशिया संकट का सीधा असर-
इस साल पश्चिम एशिया में बढ़े संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। हालात ऐसे हो गए थे, कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी। आमतौर पर ऐसी स्थिति में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जाते हैं, लेकिन भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की और इसका बड़ा बोझ खुद उठाया।
पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि विकसित देशों में पेट्रोल की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई, जबकि भारत के पड़ोसी देशों में यह बढ़ोतरी लगभग 35 प्रतिशत रही। इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल की कीमत सिर्फ 5.58 प्रतिशत बढ़ी। यही वजह रही कि उपभोक्ताओं को ज्यादा बोझ नहीं झेलना पड़ा, लेकिन तेल कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
अभी सस्ता तेल नहीं मिल रहा कंपनियों को-
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब नीचे आ चुकी हैं, लेकिन इसका फायदा तुरंत नहीं मिलने वाला। इसकी वजह यह है कि तेल कंपनियां आमतौर पर दो महीने पहले खरीदे गए कच्चे तेल को प्रोसेस करती हैं। यानी आज जिन रिफाइनरियों में तेल पहुंच रहा है, वह अप्रैल और मई में खरीदा गया था, जब कीमतें काफी ज्यादा थीं।
मंत्री ने कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें अगले दो से तीन महीनों तक इसी तरह नीचे बनी रहती हैं, तब पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल इस पर कोई निश्चित फैसला नहीं लिया गया है।
क्या पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता?
जब मंत्री से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, कि यह एक उचित सवाल है, लेकिन अभी जल्दबाजी में कुछ कहना सही नहीं होगा। अगर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें लगातार कम रहती हैं तो आने वाले समय में राहत की संभावना बन सकती है।
इस बीच निजी ईंधन विक्रेता Nayara Energy ने 1 जुलाई से अपने नेटवर्क पर पेट्रोल की कीमत 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर कम कर दी है। हालांकि सरकार का कहना है कि संकट के दौरान नायरा ने कीमतें बढ़ाई थीं और अब केवल वही बढ़ोतरी वापस ली गई है। दूसरी ओर सरकारी तेल कंपनियों ने उस समय कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी नहीं की थी।
चार महीने तक नहीं आई सप्लाई की समस्या-
सरकार का दावा है कि संकट के बावजूद देशभर के 1.07 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सप्लाई सामान्य बनी रही। न तो किसी जगह ईंधन की कमी हुई और न ही पेट्रोल पंप बंद करने जैसी नौबत आई। यह ऐसे समय में हुआ जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी हुई थी।
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फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई देती है। हालांकि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लंबे समय तक सस्ता बना रहता है तो आने वाले महीनों में आम लोगों को राहत मिल सकती है। देशभर के करोड़ों वाहन चालकों की नजर अब इसी बात पर टिकी हुई है कि वैश्विक तेल बाजार का रुख आगे क्या रहता है और उसका असर भारतीय ईंधन कीमतों पर कब दिखाई देता है।
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