Voice of Humanity: युद्ध जब विश्वविद्यालयों और स्कूलों को निशाना बनाने लगे, तो सिर्फ सैनिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक भी चुप नहीं रह सकते। भारत के शीर्ष स्ट्रिंग थ्योरिस्ट और वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक साझा बयान जारी करके ईरान, फिलिस्तीन और लेबनान के शैक्षणिक संस्थानों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। इस बयान पर 53 हस्ताक्षर हैं, जिनमें देश के प्रमुख IIT, IISER, IISc, ICTS-TIFR और अन्य संस्थानों के प्रोफेसर और 6 छात्र शामिल हैं।
कौन-कौन से संस्थानों पर हुए हमले?
अंग्रज़ी समाचार वेबसाइट द् इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बयान में स्पष्ट उल्लेख किया गया है, कि अमेरिका और इज़रायल द्वारा छेड़े गए युद्ध के दौरान ईरान के कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों पर हमले हुए। इनमें मिनाब की शजरे तैयबेह गर्ल्स स्कूल, पाश्चर इंस्टीट्यूट, शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी, ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, इस्फाहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और लेबनानी यूनिवर्सिटी शामिल हैं। बयान में यह भी याद दिलाया गया, कि इज़रायल ने गाज़ा में लगभग सभी विश्वविद्यालयों और स्कूलों को तबाह कर दिया है।
यह मानवता के खिलाफ अपराध है-
बयान में कहा गया, “हम इन अपराधों की कड़ी निंदा करते हैं। इनसे न केवल अनमोल जीवन गए, बल्कि इन क्षेत्रों में शिक्षा और शोध के भविष्य को दीर्घकालिक नुकसान होगा।” बेंगलुरु के इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंस-TIFR के प्रोफेसर सुव्रत राजू ने कहा, कि ईरानी भौतिक विज्ञानी इस क्षेत्र के मूल्यवान सदस्य हैं, जिन्होंने शानदार योगदान दिया है। उन्होंने कहा, कि ईरानी विश्वविद्यालयों की जीवंतता और वहां के आम लोगों का आतिथ्य उन्होंने खुद महसूस किया है।
किन-किन वैज्ञानिकों ने किए हस्ताक्षर?
बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में IIT मंडी के निर्मल्य काजुरी, IIT मद्रास के सुरेश गोविंदराजन, IIT बॉम्बे की पी रामादेवी, IIT भुवनेश्वर के अभिषेक चौधरी, IISER भोपाल के अर्नब रुद्र, IISc बेंगलुरु के चेतन कृष्णन, IIT कानपुर के निले कुंडू, चेन्नई मैथमेटिकल इंस्टीट्यूट के के नारायण, दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजू रॉयचौधरी, IISER मोहाली के केपी योगेंद्रन, IISc के अनिंदा सिन्हा, ICTS-TIFR के अशोक सेन और सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के शैलेश कुलकर्णी जैसे नाम शामिल हैं।
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यह पहली बार नहीं-
यह दूसरी बार है, जब भारतीय वैज्ञानिक समुदाय ने इज़रायली बमबारी के खिलाफ आवाज़ उठाई है। पिछले साल मुंबई में आयोजित इंटरनेशनल ओलंपियाड ऑन एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिज़िक्स ने गाज़ा पर हमलों के विरोध में इज़रायल को इस आयोजन से निलंबित कर दिया था। यह बयान इस बात का प्रमाण है, कि विज्ञान की दुनिया न्याय और मानवता के मुद्दों पर चुप नहीं रहती।
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