Turmeric Capital: हल्दी यह सिर्फ एक मसाला नहीं है। यह भारतीय रसोई की आत्मा है, आयुर्वेद का आधार है और हर घर में किसी न किसी रूप में मौजूद है। दाल हो या सब्ज़ी, हल्दी वाला दूध हो या शादी की रस्में हल्दी का रंग हर जगह दिखता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, कि यह सोने जैसी पीली हल्दी आती कहां से है? इसके पीछे एक ऐसे शहर की कहानी है, जिसने अपनी पहचान ही हल्दी से बना ली है।
इरोड दुनिया की हल्दी राजधानी-
तमिलनाडु का इरोड शहर दुनिया भर में “टर्मरिक कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” के नाम से जाना जाता है। इसे “येलो सिटी” यानी पीला शहर भी कहते हैं, क्योंकि यहां की गलियों से लेकर मंडियों तक हर जगह हल्दी का पीलापन छाया रहता है। यहां की मंडियों में तय होने वाले भाव पूरे भारत में हल्दी के दाम का आधार बनते हैं और निर्यात कीमतों को भी प्रभावित करते हैं। इरोड की हल्दी को भारत सरकार का जीआई टैग यानी भौगोलिक संकेत प्रमाणपत्र भी मिला हुआ है, जो इसकी उच्च कर्क्यूमिन सामग्री के लिए प्रसिद्ध है।
इरोड की हल्दी इतनी खास क्यों है?
इरोड और आसपास के ज़िलों में बड़े पैमाने पर हल्दी की खेती होती है, जो तमिलनाडु के कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा है। यहाँ की लाल दोमट मिट्टी और उचित वर्षा हल्दी की गुणवत्ता के लिए आदर्श है। इरोड की मंडी तेलंगाना के निज़ामाबाद के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी हल्दी मंडी है, जहां कई राज्यों से उत्पाद आता है। यहां से एशिया, यूरोप, मध्यपूर्व और अमेरिका तक हल्दी का निर्यात होता है। इरोड की मंडी में इरोड हल्दी, सेलम हल्दी और फिंगर व बल्ब हल्दी जैसी कई किस्में खरीदी-बेची जाती हैं।
सांगली भारत का हल्दी शहर-
जहाँ इरोड वैश्विक व्यापार में राज करता है, वहीं महाराष्ट्र का सांगली शहर भारत का हल्दी शहर कहलाता है। सांगली महाराष्ट्र के कुल हल्दी उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अकेले पैदा करता है और एशिया के सबसे महत्वपूर्ण पारंपरिक हल्दी व्यापार केंद्रों में से एक है। सांगली की हल्दी को भी जीआई टैग मिला हुआ है, जो इसके गहरे केसरिया रंग और अनूठी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। यहां 20वीं सदी की शुरुआत से ही हल्दी की नीलामी होती आ रही है, जिसने इसे वैश्विक पहचान दिलाई।
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रसोई से लेकर रस्मों तक-
हल्दी भारतीय जीवन के हर कोने में मौजूद है। करी, दाल और सब्ज़ियों में रंग और स्वाद के लिए, हल्दी वाले दूध के रूप में सेहत के लिए, धार्मिक रस्मों और शादी की हल्दी की रस्म में। आयुर्वेद में इसे औषधि माना जाता है और आधुनिक स्किनकेयर में भी इसका जलवा है। इरोड और सांगली ये दोनों शहर मिलकर भारत की हल्दी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और पूरी दुनिया को भारतीय हल्दी का सोना पहुंचाते हैं।
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