Viral Video: ज़िंदगी में कभी-कभी वो मोड़ आता है, जब सब कुछ उलट-पुलट हो जाता है। नौकरी जाती है, भविष्य धुंधला दिखता है और लगता है, अब क्या होगा। लेकिन 34 साल के ज़ीशान बखरानी के लिए यही मोड़ उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मौका बन गया। न्यूयॉर्क सिटी में आज वे बिहारी स्टाइल टाको और पाकिस्तानी-अमेरिकी स्ट्रीट फूड परोस रहे हैं और हर महीने 1.3 करोड़ रुपये तक कमा रहे हैं। लेकिन यह सफर आसान नहीं था।
दो बार गई नौकरी-
ज़ीशान प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर काम करते थे और उन्हें दो बार नौकरी से निकाला गया। जहां ज़्यादातर लोग दोबारा नौकरी की तलाश करते, वहां ज़ीशान ने एक अलग रास्ता चुना। अगस्त 2025 में उन्होंने मैनहट्टन में “निशान” नाम का अपना फूड वेंचर शुरू किया। इसमें उन्होंने अपनी बचत से 70,000 डॉलर यानी करीब 65 लाख रुपये लगाए। यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, वे सालों से वीकेंड पर फूड पॉप-अप करते आ रहे थे, यहां तक कि टेक की नौकरी के दौरान भी।
मां की रसोई से मिली प्रेरणा-
निशान का मेन्यू खास है, पाकिस्तानी चॉप्ड चीज़, बिहारी स्टाइल बरबकोआ टाको और बफेलो तंदूरी चिकन सैंडविच। लेकिन इन व्यंजनों के पीछे एक गहरी भावना है। शिकागो में पले-बढ़े ज़ीशान ने अपनी मां को देखा था, कि वे रोज़ाना के अमेरिकी खाने में जीरा, धनिया और लाल मिर्च जैसे देसी मसाले मिला देती थीं। उसी से उन्हें यह आइडिया आया।” घर पर वे टॉर्टिला की जगह परांठा लगाते थे और बर्गर में चटनी डालते थे, यही छोटे-छोटे प्रयोग आज एक बड़े कारोबार की नींव बन गए।
53 लाख से 1.3 करोड़-
शुरुआत में निशान से ज़ीशान की मासिक कमाई करीब 57,000 डॉलर यानी 53 लाख रुपये थी। आज यह बढ़कर 1,40,000 डॉलर यानी 1.3 करोड़ रुपये प्रति माह हो गई है। यानी महज कुछ महीनों में कमाई ढाई गुना से भी ज़्यादा बढ़ गई। लोग साफ तौर पर इस अनोखे फ्यूज़न खाने के दीवाने हो रहे हैं।
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लंबी मीटिंग नहीं, अब 14 घंटे रसोई में-
ज़ीशान की ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई है। पहले लंबी-लंबी मीटिंग और अप्रूवल का इंतज़ार, अब रोज़ाना 14 घंटे रसोई में बिताते हैं। थकान भले ही ज़्यादा हो, लेकिन जो संतुष्टि मिलती है, वह किसी कॉर्पोरेट नौकरी में नहीं मिली थी। ज़ीशान की यह कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है, जो नाकामी के बाद नई शुरुआत करने से डरता है।
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