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    Viral Video: यूके में 40 लाख रुपये सालाना की नौकरी, यह सुनकर ही लगता है, कि ज़िंदगी सेट है। लेकिन फिजियोथेरेपिस्ट मनव शाह के लिए यह सब होने के बावजूद कुछ था, जो भीतर से खाली लग रहा था। मात्र सवा साल के अनुभव के साथ जब वे यूके के नेशनल हेल्थ सर्विस यानी एनएचएस में 40 लाख रुपये सालाना कमा रहे थे, तब उन्होंने वह फैसला लिया, जिसे खुद उन्होंने “ज़िंदगी का सबसे मुश्किल फैसला” कहा, नौकरी छोड़ी और भारत वापस आ गए। इंस्टाग्राम पर उन्होंने यह कहानी शेयर की और लाखों लोगों के दिल को छू लिया।

    9 से 5 की नौकरी जेल जैसी लगती थी-

    मनव ने बताया, कि उनके भीतर हमेशा से एक उद्यमी की चाहत थी, खुद का कुछ बनाने की ललक। एनएचएस की नौकरी भले ही शानदार थी, लेकिन वह उन्हें घुटन देती थी। उन्होंने कहा, “मुझे लगता था, जैसे मैं एक बंद जगह में हूं, जेल में। लेकिन अब जब मैं रिहाबॉन्ड बना रहा हूं, मुझे वह आज़ादी मिलती है, जो कोई भी 9 से 5 की नौकरी नहीं दे सकती थी।” यह सिर्फ पैसे और करियर की बात नहीं थी, यह आत्मा की आज़ादी की बात थी।

    अकेलापन वो दर्द जो कोई नहीं बताता-

    मनव ने एक ऐसी बात कही, जो बहुत कम लोग ज़ुबान पर लाते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता लोग इस बारे में बात क्यों नहीं करते, लेकिन किसी पश्चिमी देश में अकेले रहना बेहद तकलीफदेह होता है। कोई भी पैसा या जीवनस्तर मां-बाप या करीबी दोस्तों के साथ एक कप चाय की जगह नहीं ले सकता।” यह एक लाइन लाखों प्रवासी भारतीयों के दिल की बात है, जो विदेश में सब कुछ पाकर भी कुछ खोया हुआ महसूस करते हैं। भारत की पारिवारिक संस्कृति, अपनापन और रिश्ते यही वह चीज़ें थीं, जो मनव को वापस खींच लाईं।

    भारत में बचत भी ज़्यादा-

    मनव ने यह भी बताया, कि भारत लौटने का एक व्यावहारिक कारण यह भी था, कि यहां रहना किफायती है। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान है और ज़्यादा बचत भी हो सकती है। यानी यूके की चमक-दमक के बावजूद भारत में रहकर भी एक अच्छी और संतुलित ज़िंदगी जी जा सकती है।

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    कभी-कभी आगे बढ़ना दोबारा शुरू करने जैसा दिखता है-

    मनव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्होंने यूके में एक पूरी ज़िंदगी बनाई थी, करियर, दोस्त, रूटीन और सुकून। उसे छोड़ना आसान नहीं था। रातों की नींद उड़ी, अनगिनत “क्या होगा अगर” के सवाल मन में आए। लेकिन उन्होंने हिम्मत को आरामदायक ज़िंदगी से ऊपर रखा। उनका संदेश साफ है, “यूके छोड़ना हार नहीं थी, यह निश्चितता की जगह साहस को और आराम की जगह उद्देश्य को चुनना था।”

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।