90 Degree Railway Overbridge
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    90 Degree Railway Overbridge: भोपाल के ऐशबाग में बना रेलवे ओवरब्रिज पिछले करीब एक साल से पूरे देश में मज़ाक का विषय बना हुआ था। वजह थी उसका वह खतरनाक 90 डिग्री का मोड़ जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाता था। इस पुल पर कोई वाहन मुड़ने की कोशिश करता तो पलटने का खतरा था, यानी पुल खुलने से पहले ही “मौत का फंदा” बन चुका था। जून 2025 में बनकर तैयार हुए इस पुल का उद्घाटन होने से पहले ही इसकी तस्वीरें वायरल हो गईं और देश-दुनिया में इसकी खिल्ली उड़ने लगी। अब 10 महीने बाद आखिरकार इस गतिरोध का हल निकला है।

    क्या होगा बदलाव-

    पीडब्ल्यूडी और रेलवे के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद तय हुआ है, कि पुल को नए सिरे से डिज़ाइन किया जाएगा। सबसे बड़ा बदलाव उस खतरनाक मोड़ में होगा, मोड़ की त्रिज्या यानी रेडियस को 2 मीटर से बढ़ाकर करीब 2.5 मीटर किया जाएगा। साथ ही पुल की चौड़ाई भी 8.5 मीटर से बढ़ाकर 10.5 से 11 मीटर की जाएगी।

    अधिकारियों का कहना है, कि इसके बाद न सिर्फ छोटी कारें बल्कि मध्यम और भारी वाहन भी सुरक्षित रूप से गुज़र सकेंगे। रेलवे से तकनीकी विवरण मिलते ही चार से पांच दिनों में काम शुरू हो जाएगा और दिलचस्प बात यह है, कि जिस कंपनी ने यह गलत पुल बनाया, उसी को इसे ठीक करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।

    मीम्स से लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चा तक-

    जैसे ही पुल की तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई। यह पुल देश-विदेश में खराब इंफ्रास्ट्रक्चर योजना की मिसाल बन गया। सरकार की किरकिरी हुई और सात पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया। मैनिट समेत कई विशेषज्ञ एजेंसियों को जांच में लगाया गया। जांच में सामने आया, कि पास में मेट्रो लाइन होने की वजह से डिज़ाइन में बेहद सीमित जगह थी, जिससे मोड़ को चौड़ा करना मुश्किल हो गया था। इसी तकनीकी उलझन ने रेलवे और पीडब्ल्यूडी के बीच महीनों तक खींचतान जारी रखी।

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    असली सवाल अभी भी बाकी है-

    पुल शायद जल्द खुल जाए, लेकिन जो सवाल यह पुल छोड़ गया है, वह बंद होने का नाम नहीं ले रहा। 18 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल आखिर बिना किसी जांच के कैसे मंज़ूर हो गया? जनता के पैसे से बने इस ढांचे में इतनी बड़ी खामी क्यों नहीं पकड़ी गई? भोपाल के निवासियों के लिए यह मामला सिर्फ एक पुल का नहीं, बल्कि सरकारी जवाबदेही और इंफ्रास्ट्रक्चर योजना की गुणवत्ता का है। पुल दुरुस्त हो जाएगा, लेकिन इस पूरे प्रकरण से मिला सबक क्या हम याद रखेंगे?

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।