Fine for Abusing
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    Fine for Abusing: मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव ने पूरे देश को एक नई सोच दी है। बोरसर गांव की पंचायत ने एक ऐसा नियम बनाया है, जो सुनने में भले ही अनोखा लगे, लेकिन इसका असर ज़मीन पर साफ दिखने लगा है। अब इस गांव में अगर कोई सार्वजनिक जगह पर गाली-गलौज करता है, तो उसे 500 रुपये जुर्माना भरना होगा।

    अगर फिर भी नहीं माना, तो कम से कम एक घंटे तक झाड़ू लगाकर सड़क साफ करनी होगी। करीब छह हज़ार की आबादी वाले इस गांव में यह नियम अब सिर्फ कागज़ पर नहीं, पूरे गांव में लगे पोस्टरों पर और लोगों के व्यवहार में भी दिखने लगा है।

    मुंबई से लौटे युवा ने बोया बदलाव का बीज-

    इस पूरी मुहिम की शुरुआत 29 साल के समाजसेवी अश्विन पाटिल ने की, जो करीब एक दशक मुंबई में रहने के बाद गांव लौटे थे। उन्होंने देखा, कि गांव की गलियों और चौराहों पर खुलेआम गाली-गलौज हो रही है, जिससे महिलाएं और बच्चे असहज महसूस करते हैं। उन्होंने यह विचार सरपंच अंतर सिंह और उपसरपंच विनोद शिंदे के सामने रखा और दोनों ने तुरंत हां कर दी। पंचायत ने इस विचार को औपचारिक रूप दिया, पूरे गांव में पोस्टर लगाए गए, सामूहिक संकल्प लिया गया और 20 से अधिक वार्ड सदस्यों को सार्वजनिक स्थानों खासकर चौराहों पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी दी गई।

    12-13 साल के बच्चे भी बोलने लगे थे गालियां-

    सरपंच अंतर सिंह ने बताया, कि हालात इतने बिगड़ गए थे, कि 12-13 साल के बच्चे भी खुलेआम अपशब्द बोलने लगे थे। गांव में दो-तीन गंभीर विवाद भी हो चुके थे, जहां एक की गाली दूसरे की गाली को जन्म देती थी और मामला बढ़ता चला जाता था। लेकिन अब बदलाव दिख रहा है। सरपंच कहते हैं, कि पहले लोग चौराहों पर बेझिझक गाली देते थे, अब वे हिचकिचाते हैं। गांव की महिलाएं इस बदलाव से खुश हैं।

    सुबह 8:30 बजे राष्ट्रगान-

    इस गांव में एक और बदलाव पिछले दो महीनों से चुपचाप जड़ें जमा रहा है। हर सुबह 8:30 बजे मंदिर के लाउडस्पीकर पर राष्ट्रगान बजता है और गांव के लोग जो भी काम कर रहे हों, रुककर सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाते हैं और साथ मिलकर गाते हैं। यह छोटी सी कोशिश गांव में एकता और अनुशासन का एक नया भाव भर रही है।

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    साफ गांव, हरा गांव, जुड़ा गांव-

    भाषा सुधार के साथ-साथ पंचायत ने पिछले तीन महीनों में पूरे गांव में कूड़ेदान लगाए हैं, “हर घर हरियाली” अभियान के तहत पौधारोपण किया है और सार्वजनिक चौकों पर मुफ्त वाई-फाई की सुविधा दी है। एक “सेवा कक्ष” भी बनाया गया है, जहां ज़रूरतमंद लोग बिना किसी संकोच के ज़रूरी सामान ले सकते हैं। बोरसर गांव आज देश के सामने एक मिसाल है, कि अगर नीयत साफ हो और समाज साथ हो, तो बदलाव की शुरुआत किसी भी छोटी जगह से हो सकती है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।