FSSAI Food License: देश के लाखों रेस्टोरेंट मालिकों, छोटे खाने-पीने की दुकान चलाने वालों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है, अब खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण जीवन भर के लिए वैध होंगे। यानी एक बार लाइसेंस मिला तो बार-बार नवीनीकरण की ज़रूरत नहीं, जब तक कोई नियम उल्लंघन न हो। यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल से लागू होगी।
रेहड़ी वालों को दोहरा फायदा-
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उठाने वाले हैं स्ट्रीट वेंडर यानी रेहड़ी-पटरी वाले। जो विक्रेता पहले से स्ट्रीट वेंडिंग कानून के तहत पंजीकृत हैं, उन्हें अब अलग से खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत पंजीकरण नहीं कराना पड़ेगा। पुराना पंजीकरण ही मान्य होगा। इससे न सिर्फ कागज़ी झंझट कम होगी बल्कि अनावश्यक फीस से भी छुटकारा मिलेगा।
कारोबार का वर्गीकरण हुआ आसान-
FSSAI ने कारोबारों को वर्गीकृत करने का तरीका भी सरल किया है। 1.5 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाले छोटे व्यवसायों को केवल बुनियादी पंजीकरण की ज़रूरत होगी। बड़े कारोबारों को उनके आकार के हिसाब से राज्य या केंद्रीय लाइसेंस लेना होगा। यह बदलाव छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए काफी राहत देने वाला है।
अब जाँच होगी खतरे के हिसाब से-
निरीक्षण का तरीका भी बदलेगा। अब नियमित जांच की जगह जोखिम आधारित प्रणाली अपनाई जाएगी। जिन व्यवसायों का रिकॉर्ड अच्छा है उन पर कम जाँच होगी जबकि जो बार-बार नियम तोड़ते हैं उन पर कड़ी नज़र रखी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद कागज़ी काम कम करके असली खाद्य सुरक्षा पर ध्यान देना है।
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स्वच्छता में कोई समझौता नहीं-
हालांकि FSSAI ने साफ कर दिया है, कि स्वच्छता मानकों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। डेयरी, माँस और पैकेज्ड पानी जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सख्ती पहले जैसी ही रहेगी। इस नई व्यवस्था में ज़्यादातर खाद्य कारोबार राज्य सरकारों के दायरे में आएंगे जिससे राज्यों की निगरानी और प्रवर्तन में भूमिका और बढ़ेगी। यह फैसला “Ease of Doing Business” की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम है।
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