Iran Internet Cable Threat: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने चेतावनी दी है, कि वो Red Sea के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को काट सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो भारत समेत दुनिया के कई देशों में इंटरनेट ब्लैकआउट हो जाएगा। ऑनलाइन पेमेंट से लेकर ई-कॉमर्स तक सब कुछ ठप हो जाएगा।
समंदर के नीचे बिछी केबल पर मंडरा रहा खतरा-
वेस्ट एशिया में तनाव अब भारत के डिजिटल भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। समुद्र तल के नीचे बिछाई गई सबसी डेटा केबल्स, जो महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर हैं, अब इस संघर्ष के कारण गंभीर खतरे में हैं। ईरान ने साफ तौर पर धमकी दी है कि वो इन्हें काट सकता है। ये डेटा केबल्स ही वो महत्वपूर्ण कड़ियां हैं, जो भारत को दुनिया के बाकी हिस्सों से जोड़ती हैं।
केंद्र सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों और केबल ऑपरेटरों को इस आसन्न खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। Department of Telecommunications (DoT) ने इन कंपनियों को निर्देश दिया है, कि वे संभावित जोखिमों का विश्लेषण करें और वैकल्पिक रूट तैयार रखें।
Strait of Hormuz और Red Sea में बड़ा खतरा-
भारत का लगभग एक तिहाई डेटा ट्रैफिक, खासकर अमेरिका और यूरोप के साथ आदान-प्रदान होने वाला, Strait of Hormuz और Red Sea से होकर गुजरता है। ईरान ने इन समुद्री रूटों पर स्थित केबल्स को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी है, जिससे चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। अगर ये केबल्स कट जाती हैं, तो फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन, ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया और IT इंडस्ट्री समेत विभिन्न सेक्टर्स के ऑपरेशन पूरी तरह ठप हो सकते हैं।
सोचिए अगर एक दिन के लिए भी इंटरनेट बंद हो जाए तो क्या होगा? ऑनलाइन पेमेंट नहीं कर पाएंगे, Amazon या Flipkart से शॉपिंग नहीं कर पाएंगे, WhatsApp, Instagram, Facebook सब बंद। ऑफिस का काम रुक जाएगा, बैंकिंग ठप हो जाएगी। यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा।
सरकार के पास क्या विकल्प हैं-
हालांकि कुछ डेटा ट्रैफिक को सिंगापुर के जरिए रीरूट किया जा सकता है, लेकिन उस रूट में देश के पूरे डेटा लोड को संभालने की क्षमता नहीं है। इसके अलावा Pacific Ocean के पार का रूट काफी लंबा और बेहद महंगा है, जिसके कारण इंटरनेट स्पीड कम हो सकती है। नतीजतन, भारत में इंटरनेट यूजर्स को धीमी कनेक्शन स्पीड के साथ समझौता करना पड़ सकता है। भारत Strait of Hormuz और Red Sea के पार बिछी डेटा केबल्स पर बहुत ज्यादा निर्भर है।
कंपनियां अलर्ट पर, लेकिन चुनौती है बड़ी-
हाल ही में जेद्दाह, सऊदी अरब के पास Airtel की SMW4, IMEWE और FALCON जैसी कई प्रमुख केबल सिस्टम को काटने की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। इसके अलावा Tata Communications की TATA TGN-Gulf और Africa Pearls जैसे नेटवर्क भी जोखिम में हैं। वर्तमान में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स जैसे Reliance Jio की ‘India-Europe-Express’ और ‘India-Asia-Express’ के साथ-साथ Google की ‘Blue-Raman’ और ‘Dhivaru’ भी संभावित जोखिमों का सामना कर रहे हैं।
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एक अधिकारी ने बताया, कि हालांकि कंपनियां आमतौर पर छोटी-मोटी तकनीकी खराबी को संभालने के लिए स्पेयर कैपेसिटी रखती हैं, लेकिन वे पूर्ण रूप से युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार नहीं थीं। यह स्थिति बताती है, कि भारत की डिजिटल इकोनॉमी कितनी नाजुक है और हमें वैकल्पिक व्यवस्थाओं की कितनी सख्त जरूरत है।
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