Joe Kent
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    Joe Kent: अमेरिका में एक बड़ी हलचल मच गई है। देश के राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र के प्रमुख Joe Kent ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है, कि वे ईरान के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं कर सकते। इस इस्तीफे ने अमेरिकी विदेश नीति और ईरान जंग को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

    कौन हैं Joe Kent?

    Joe Kent अमेरिकी सेना के पूर्व विशेष बल अधिकारी हैं, जिन्हें जुलाई 2023 में राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र का प्रमुख नियुक्त किया गया था। इससे पहले उन्होंने दो बार कांग्रेस का चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार हार गए। उनकी नियुक्ति के वक्त भी काफी विवाद हुआ था, क्योंकि विपक्षी दल के कई सांसदों ने उनके कुछ पुराने संगठनों से जुड़ाव और षड्यंत्र की बातों को बढ़ावा देने पर सवाल उठाए थे। बावजूद इसके वे इस अहम पद पर काबिज रहे, जब तक उन्होंने खुद इस्तीफा नहीं दे दिया।

    इस्तीफे की वजह-

    Kent ने साफ शब्दों में कहा. कि ईरान अभी अमेरिका के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं है और यह जंग इज़रायल-अमेरिका में उसके समर्थकों के दबाव में शुरू की गई है। उनका यह बयान ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर सीधा हमला है, जो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को जायज ठहराती रही है।

    उसी दिन ईरान में बड़े हमले-

    Kent के इस्तीफे के दिन ही इज़रायल के रक्षा मंत्री ने एलान किया, कि हवाई हमले में ईरान के प्रमुख सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी को मार गिराया गया। इज़रायली सेना ने रिवोल्यूशनरी गार्ड की बसीज फोर्स के कमांडर गुलाम रजा सुलेमानी की मौत की भी पुष्टि की। इन हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी के अरब देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए और होर्मुज जलसंधि पर अपना नियंत्रण जताया। अब तक ईरान में 1,300 से ज्यादा और लेबनान में करीब 880 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि इज़रायल में 12 मौतें हुई हैं।

    व्हाइट हाउस चुप, सीनेटर ने किया बचाव-

    Kent के इस्तीफे पर व्हाइट हाउस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। लेकिन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा, कि अमेरिका ने ईरान को कमतर नहीं आंका और कड़ा जवाब देना जरूरी था।

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    इंसानी संकट की आहट-

    इस पूरे संघर्ष का सबसे दर्दनाक पहलू यह है, कि लाखों आम लोगों की जिंदगी तबाह हो रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के मुताबिक, सिर्फ लेबनान में 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है, कि अगर यह जंग लंबी खिंची तो करोड़ों लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच सकते हैं।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।