Horror Movie Darwaza: आज के ज़माने में CGI राक्षसों और multiplex jump scares की भरमार है, लेकिन एक वक्त था, जब एक छोटे बजट की हिंदी हॉरर फिल्म ने इतना खौफ फैलाया, कि सिनेमाघरों के बाहर एम्बुलेंस खड़ी करनी पड़ी। बात है, 21 जनवरी 1978 को रिलीज़ हुई फिल्म ‘दरवाज़ा’ की, जिसे रामसे ब्रदर्स, तुलसी रामसे और श्याम रामसे ने बनाया था। यह फिल्म अपने भयानक राक्षस, डरावने माहौल और एक अनोखी मार्केटिंग चाल की वजह से आज भी बॉलीवुड हॉरर की दुनिया में एक अलग मुकाम रखती है।
अकेले देखने की हिम्मत है तो जीतो ₹10,000-
फिल्म के वितरकों ने एक ऐसा दांव खेला, जो उस ज़माने में किसी ने सोचा भी नहीं था। उन्होंने ऐलान किया, कि जो भी दर्शक अकेले सिनेमाघर में ‘दरवाज़ा’ देख लेगा, उसे ₹10,000 नकद इनाम मिलेगा। यह रकम उस दौर में बेहद बड़ी थी। इतना ही नहीं, फिल्म दिखाने वाले कई सिनेमाघरों के बाहर एम्बुलेंस भी तैनात की गई, मानो कह रहे हों, कि यह फिल्म देखकर बेहोश हो गए, तो इलाज तैयार है। कहा जाता है, कि इनाम की इतनी बड़ी रकम के बावजूद कोई भी दर्शक यह चुनौती स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया और इसी से फिल्म का रुतबा और भी बढ़ गया।
कहानी एक पुराने अभिशाप की-
फिल्म में अनिल धवन, इम्तियाज़ खान, अंजू महेंद्रू, श्यामाली, त्रिलोक कपूर, सत्येंद्र कपूर और शक्ति कपूर जैसे कलाकार थे। कहानी ठाकुर परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक पुराने अभिशाप से पीड़ित है। यह अभिशाप देवी काली के एक भक्त की मौत से जन्मा था, जिसे ठाकुर ने मारा था। रामसे ब्रदर्स की खासियत यही थी, कि वे कम बजट में भी माहौल और डर की ऐसी चादर बुनते थे, जो दर्शक को अपने में लपेट लेती थी।
लंदन से मंगाया गया मेकअप-
फिल्म का सबसे डरावना हिस्सा था, इसका राक्षस, जिसे दुनिया के मशहूर मेकअप आर्टिस्ट Christopher Tucker की मदद से तैयार किया गया था। उस ज़माने में भारत में ऐसे मेकअप आर्टिस्ट नहीं मिलते थे, इसलिए रामसे ब्रदर्स को लंदन से मेकअप सामग्री मंगानी पड़ी। रामसे परिवार की तीसरी पीढ़ी के दीपक रामसे ने The Indian Express को बताया, “उस वक्त ऐसे बहुत कम मेकअप कलाकार थे, जो सच में डरावना कुछ बना सकें।” वह राक्षस जब पहली बार परदे पर आया तो उस दौर के दर्शक, जो भारतीय सिनेमा में ऐसा कुछ देखने के आदी नहीं थे, सीटों पर सिहर उठे।
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कल्ट क्लासिक बनी ये फिल्म-
‘दरवाज़ा’ अपने वक्त में जबरदस्त हिट रही और हॉरर के दीवानों के बीच इसने एक खास जगह बना ली। IMDb पर इसे 5.5 की रेटिंग मिली है और आज भी इसे रामसे ब्रदर्स की सबसे यादगार फिल्मों में गिना जाता है। ‘पुराना मंदिर’ (1984) और ‘वीराना’ (1988) जैसी उनकी बाद की फिल्में भी चर्चित रहीं, लेकिन ‘दरवाज़ा’ वह पहली फिल्म थी, जिसने यह साबित किया, कि डर को भी बेचा जा सकता है और खूब बेचा जा सकता है।
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