Weight Loss Without Gym: सच कहें, तो हम सभी को जंक फूड की तलब रहती है। जब दिन खराब हो तो सबसे आसान यही होता है, कि कुछ भी खा लो। खासकर उन लोगों के लिए जो हाई-प्रेशर जॉब्स में हैं, खाना भूख का नहीं बल्कि इमोशंस का सवाल बन जाता है और इसी तरह वजन बढ़ता चला जाता है, चुपचाप, धीरे-धीरे, बिना एहसास दिलाए। एक दिन अचानक आईने में देखते हैं, तो खुद को पहचान नहीं पाते। ADSMITH के फाउंडर निरज झा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
जब करियर ने सेहत को पीछे धकेल दिया-
निरज एक एंटरप्रेन्योर थे, जो अपने काम की भागदौड़ में डूबे हुए थे। फाउंडर की जिम्मेदारियों ने उनकी हेल्थ को इतना पीछे धकेल दिया, कि वो पूरी तरह गायब हो गई। अपने सबसे हैवी वेट पर वो 144 किलो तक पहुंच गए थे। आज 52 साल की उम्र में निरज का वजन 79 किलो है। उन्होंने दो साल में 65 किलो वजन कम किया, बिना किसी मैजिक पिल, सेलिब्रिटी ट्रेनर या सर्जरी के। बस अपनी आदतों से ज्यादा जिद्दी बनकर।
144 किलो पर जीना मतलब हर पल का संघर्ष था। निरज बताते हैं, कि वजन बढ़ना इतना धीमा था, कि उन्हें खुद पता नहीं चला। काम में तो वो कामयाब थे, लेकिन शरीर इसकी कीमत चुका रहा था। नींद अधूरी, एनर्जी बिल्कुल नहीं और लगातार सांस फूलना। लेकिन सबसे मुश्किल था डर। निरज ने पहले भी वजन कम करने की कोशिश की थी, लेकिन हर बार कुछ न कुछ हो जाता था – बीमार पड़ जाते या चोट लग जाती। धीरे-धीरे उन्होंने खुद से यह झूठ बोलना शुरू कर दिया, “शायद मेरा शरीर ही ऐसा है। शायद अब बदलाव मुमकिन नहीं।”
ICU में मिली असली सीख-
जून 2023 में निरज को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। एक्यूट LRTI (लोअर रेस्पिरेटरी लंग इन्फेक्शन) की वजह से उन्हें ICU में रखा गया और BiPAP मशीन पर डाला गया। वहीं पहली बार सालों बाद उन्हें पूरी नींद आई। निरज कहते हैं, “मुझे एहसास हुआ कि मैं सालों से सिर्फ थका नहीं था, बल्कि दम घुट रहा था।” यह मोमेंट उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया।
‘एंटी-एक्सपर्ट’ अप्रोच सिंपल लेकिन इफेक्टिव
ज्यादातर लोग वजन घटाने के लिए जिम मेंबरशिप, न्यूट्रिशनिस्ट और सप्लिमेंट्स का सहारा लेते हैं। निरज ने इसका उल्टा किया। ना जिम, ना ट्रेनर, ना सप्लिमेंट्स। बस कंसिस्टेंसी और अवेयरनेस। उन्होंने एक मंत्र फॉलो किया – ‘कैलोरी डेफिसिट’। कोई रिजिड डाइट नहीं, बस यह ईमानदारी कि क्या खा रहे हैं।
पहले दिन निरज सिर्फ आठ मिनट चल पाए। लेकिन उन्होंने खुद से वादा किया कि रोज उतना तो करेंगे ही। धीरे-धीरे आठ मिनट दस में, फिर पंद्रह में बदल गए। उन्होंने स्केल पर नंबर नहीं, बल्कि खुद के लिए शो अप होना तय किया।
प्लेटो से मिला सबसे बड़ा सबक-
120 किलो के आसपास पांच महीने तक वजन एक जगह अटक गया। यहीं ज्यादातर लोग हार मान लेते हैं। लेकिन निरज ने साइंस की तरफ रुख किया। हाई-प्रोटीन, लो-कार्ब डाइट अपनाई। अंडे, चिकन, मछली, पनीर, ग्रीक योगर्ट और ढेर सारी सब्जियां। रिफाइंड कार्ब्स सिर्फ दो फुलके तक सीमित। बेकरी आइटम्स, ब्रेड, बिस्किट – सब बंद। फ्रूट्स भी हफ्ते में एक-दो। रिफाइंड शुगर बिल्कुल नहीं। 18 महीने तक अल्कोहल को भी गुडबाय। साथ में रोज एक घंटे की वॉक और हफ्ते में तीन बार 20-25 मिनट की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग।
79 किलो पर मिली असली खुशी-
जब निरज 79 किलो तक पहुंचे, तो कोई बड़ा सेलिब्रेशन नहीं था। बस एक गहरी शांति थी। वो आसानी से मूव कर पाते थे, एनर्जी से भरे उठते थे, और आईने में खुद को पहचान पाते थे। सबसे बड़ी जीत थी कि उन्होंने खुद पर भरोसा वापस पा लिया। इसी अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने 3E Fitness की स्थापना की – सही खाना, नियमित एक्सरसाइज और मानसिक विकास पर आधारित एक वेलनेस प्लेटफॉर्म।
एक्सपर्ट की राय-
दे फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक, Max Super Speciality Hospital की डॉ. प्राची जैन बताती हैं कि निरज का तरीका बिल्कुल सही था। धीमा और स्थिर वजन घटाना मेटाबॉलिज्म के लिए बेहतर होता है और दोबारा वजन बढ़ने की संभावना कम करता है। हाई-प्रोटीन, लो-कार्ब डाइट और वॉकिंग से शुरुआत – ये सब साइंटिफिकली सही हैं।
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निरज की सलाह-
निरज कहते हैं, “ट्रांसफॉर्मेशन का टारगेट मत रखो, वो बहुत बड़ा है। बस कंसिस्टेंसी का टारगेट रखो। छोटा शुरू करो – आठ मिनट चलो, एक ग्लास एक्स्ट्रा पानी पियो, कॉफी में शुगर छोड़ दो। अगले महीने की नहीं, बस आज की सोचो।” निरज इस बात का जीता-जागता सबूत हैं कि 52 की उम्र में भी आप अटके हुए नहीं हैं, बस एक आठ मिनट की वॉक दूर हैं एक पूरी तरह से अलग जिंदगी से।
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