Ways to Get Promotion
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    Ways to Get Promotion: पुणे के रोहित यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी चार वर्क हैबिट्स शेयर कीं, जिन्होंने उन्हें प्रमोशन दिलाने में मदद की। लेकिन इंटरनेट पर इसे लेकर दो राय बन गई हैं। कुछ लोग इसे कारगर मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है, कि ये सब सिर्फ सपोर्टिव एनवायरनमेंट में ही काम करता है।

    मेहनत काफी नहीं, स्ट्रैटेजी भी जरूरी-

    रोहित ने अपनी पोस्ट में लिखा, कि कुछ साल पहले वो खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे थे। वो लगातार मेहनत कर रहे थे, लेकिन करियर में ग्रोथ नहीं हो रही थी। तब उन्हें एहसास हुआ, कि सिर्फ अच्छा काम करना काफी नहीं है, बल्कि ये भी जरूरी है, कि आप अपने काम को स्ट्रैटेजिक तरीके से कैसे दिखाते हैं। रोहित ने चार खास आदतें अपनाईं, जिन्हें धीरे-धीरे डेवलप किया। हालांकि ये बदलाव एक रात में नहीं आए, लेकिन इन्होंने ऑफिस में लोगों की उनके प्रति सोच बदल दी।

    पहली आदत थी वीकली विंस। हर शुक्रवार को रोहित तीन चीजें नोट करते थे, जो उन्होंने उस हफ्ते पूरी की थीं, चाहे वो कितनी भी छोटी क्यों न हों। उन्होंने कहा, कि इससे उन्हें क्लैरिटी मिली और रिव्यू के दौरान वो कॉन्फिडेंटली अपने काम के बारे में बात कर पाए।

    मंथली मैनेजर अपडेट्स से बना विजिबिलिटी का फॉर्मूला-

    दूसरी आदत थी, मंथली मैनेजर अपडेट्स। महीने में एक बार रोहित अपने मैनेजर को एक मैसेज भेजते थे, जिसमें वो बताते थे, कि उन्होंने किस चीज पर काम किया, क्या आउटकम मिले और क्या सीखा। उन्होंने कहा, कि ये बिना शेखी बघारे खुद को विजिबल बनाने का तरीका था। कोई एक्स्ट्रा शब्द नहीं, सिर्फ रिजल्ट्स।

    तीसरी आदत थी, वन-ऑन-वन मीटिंग्स में सही सवाल पूछना। रोहित अपने मैनेजर से पूछते थे, कि अगले लेवल के लिए तैयार दिखने के लिए उन्हें किसमें सुधार करना चाहिए। इस सवाल से उन्हें ईमानदार फीडबैक मिलता था और लोगों की नजर में उनकी इमेज बदलने लगी।

    चौथी और आखिरी आदत थी मीटिंग्स में बोलना, भले ही बस एक छोटा सा इनपुट ही क्यों न हो। रोहित ने कहा, कि इससे उनकी प्रेजेंस बनी और इनिशिएटिव दिखा। चुप रहने वाले कंट्रीब्यूटर्स आसानी से भुला दिए जाते हैं और वो उनमें से एक नहीं बनना चाहते थे।

    इंटरनेट पर बंटी राय-

    जैसे ही पोस्ट वायरल हुई, सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी राय शेयर करनी शुरू कर दी। कुछ लोगों ने इस एडवाइस की तारीफ की तो कुछ ने कहा, कि ये सब सिर्फ सपोर्टिव एनवायरनमेंट में ही काम करता है। एक यूजर ने लिखा, कि मैंने खासकर नंबर दो पॉइंट ट्राई किया, लेकिन वो मेरे लिए काम नहीं किया। मेरा मानना है, कि आपको एक सपोर्टिव मैनेजर चाहिए, जो वाकई सुने और केयर करे। एक और यूजर ने कहा, कि जहां फेवरिटिज्म चलता है, वहां ये सब नहीं चलता।

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    हालांकि कुछ लोगों ने अपना अनुभव शेयर करते हुए शुक्रिया कहा। एक यूजर ने लिखा, कि इससे मुझे ज्यादा काम मिल रहा है और अगली अच्छी इंक्रीमेंट का वादा भी मिला है। एक नए कॉर्पोरेट एम्प्लॉई ने कहा, कि वो कल से ही इन टिप्स को फॉलो करना शुरू कर देंगे। कुछ स्केप्टिकल यूजर्स ने कहा,, कि लिंक्डइन पर ओवरली ऑप्टिमिस्टिक एटिट्यूड दिखाने से आपको कहीं न कहीं जगह जरूर मिलेगी, शायद इस जॉब में नहीं, तो आपके नेटवर्क में जरूर।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।