Viral Video: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक ऐसी खबर आई है, जो भारत के युवाओं की प्रतिभा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बढ़ती रुचि को दर्शाती है। शिव चरण इंटर कॉलेज के कक्षा 12वीं के छात्र आदित्य कुमार ने सिर्फ ₹25,000 की लागत में एक AI रोबोट टीचर बनाकर सबको हैरान कर दिया है। इस रोबोट का नाम ‘सोफी’ रखा गया है और यह अब स्कूल के स्टाफ का हिस्सा बन चुकी है। आदित्य की इस अद्भुत उपलब्धि ने न केवल उनके स्कूल बल्कि पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
हाई-टेक टेक्नोलॉजी से बनाई गई सोफी-
आदित्य ने एक इंटरव्यू में बताया, कि उन्होंने हाई-टेक टेक्नोलॉजी का उपयोग करके इस मॉडल को तैयार किया है, जो छात्रों को पढ़ा सकती है और उनसे बातचीत भी कर सकती है। ANI द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में आदित्य को AI रोबोट को टेस्ट करते हुए देखा जा सकता है। जब आदित्य सोफी से अपना परिचय देने के लिए कहते हैं, तो रोबोट जवाब देती है, “हैलो बच्चो, मैं एक AI टीचर हूं, मेरा नाम सोफी है और मुझे आदित्य ने इन्वेंट किया है, मैं शिव चरण इंटर कॉलेज, बुलंदशहर में पढ़ाती हूं।”
#WATCH | Bulandshahr, UP | A 17-year-old student from Shiv Charan Inter College, Aditya Kumar, has built an AI teacher robot named Sophie, equipped with an LLM chipset.
— ANI (@ANI) November 29, 2025
The robot says, "I am an AI teacher robot. My name is Sophie, and I was invented by Aditya. I teach at… pic.twitter.com/ArJYSsf39F
सटीक जवाब देने की क्षमता-
सोफी की नॉलेज और टीचिंग एबिलिटी को टेस्ट करने के लिए आदित्य ने उससे कई सवाल पूछे जैसे भारत के पहले राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कौन थे और बिजली क्या है। रोबोट ने सभी सवालों के सटीक जवाब दिए, जो इसकी तकनीकी उत्कृष्टता को दर्शाता है। यह छात्रों के डाउट्स क्लियर करने में सक्षम है और एक असली टीचर की तरह इंटरैक्ट कर सकती है।
LLM चिपसेट से बना है सोफी का दिमाग-
रोबोट बनाने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए आदित्य ने कहा, “मैंने इस रोबोट को बनाने के लिए एक LLM चिपसेट का उपयोग किया है, जो बड़ी कंपनियां भी रोबोट बनाने में इस्तेमाल करती हैं। यह छात्रों के संदेह दूर कर सकती है। फिलहाल यह केवल बोल सकती है, लेकिन हम इसे डिजाइन कर रहे हैं ताकि यह जल्द ही लिख भी सके।” आदित्य का यह प्रयास भविष्य की शिक्षा प्रणाली में AI की भूमिका को लेकर एक नई दिशा दिखाता है।
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हर जिले में रिसर्च लैब की मांग-
आदित्य ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने कहा, कि छात्रों को रिसर्च करने के लिए हर जिले में एक उचित लैब की सुविधा मिलनी चाहिए। “हर जिले में एक लैब होनी चाहिए, जहां छात्र आकर रिसर्च कर सकें।” उनका मानना है, कि अगर उन्हें अधिक तकनीकी रूप से उन्नत लैब्स और संसाधन मिलें, तो सोफी लिखने में भी सक्षम हो सकती है। फिलहाल सोफी हिंदी भाषा और वोकल स्किल्स से लैस है। आदित्य का यह आविष्कार भारत के युवाओं में टेक-सेवी इन्वेंशन बनाने की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
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