Iran Protests: ईरान पिछले दो हफ्तों से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चपेट में है। यह इस्लामिक रिपब्लिक के लिए सालों की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। 100 से ज्यादा शहरों में फैले इस प्रोटेस्ट में अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों को गिरफ्तार किया जा चुका है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, जो कुकिंग ऑयल और चिकन की कीमतों के गुस्से से शुरू हुआ था, वह अब सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ सीधी बगावत में बदल गया है।
कैसे भड़की यह आग-
तेहरान के बाजारों में अचानक बेसिक चीजों के दाम आसमान छू गए। सेंट्रल बैंक ने सब्सिडाइज्ड डॉलर रेट की सुविधा खत्म कर दी, जिससे रातोंरात कीमतें दोगुनी हो गईं। कई जगहों पर तो सामान ही गायब हो गया। दुकानदारों ने दुकानें बंद कर दीं। यह बेहद असामान्य था, क्योंकि बाजार के ये व्यापारी हमेशा सरकार के सबसे वफादार समर्थक रहे हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति में भी इनकी अहम भूमिका थी। इनका विरोध करना खामेनेई के लिए खतरे की घंटी है।
सरकार ने छोटे कैश हैंडआउट देकर माहौल शांत करने की कोशिश की, लेकिन गुस्सा काबू से बाहर हो गया। यह 2022 के महसा अमीनी की मौत के बाद हुए “Woman, Life, Freedom” आंदोलन से भी बड़ा विरोध प्रदर्शन है।
कितनी खतरनाक है स्थिति-
इलाम और लोरेस्तान समेत पूरे देश में प्रदर्शन फैल चुके हैं। भीड़ ने सड़कों पर आग लगा दी है। “Death to Khamenei” के नारे गूंज रहे हैं। नॉर्वे स्थित Iran Human Rights संगठन के अनुसार, 45 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। ईरानी स्टेट मीडिया कहता है, कि सैकड़ों पुलिस और पैरामिलिट्री घायल हुए हैं। इंटरनेट को बार-बार बंद किया जा रहा है।
क्यों अलग है यह प्रोटेस्ट-
इस बार विरोध सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारी खुलेआम पूरे सिस्टम को बदलने की मांग कर रहे हैं। एनालिस्ट्स का कहना है, कि यह सालों की महंगाई, करप्शन, मिसमैनेजमेंट और गिरते जीवन स्तर से उपजी थकान को दर्शाता है। 2024 में इकोनॉमिक रिफॉर्म के वादे पर चुने गए राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के पास सीमित अधिकार हैं। असली ताकत खामेनेई और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पास है।
रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अब घोषणा की है कि सिस्टम को बचाना उनकी “रेड लाइन” है। यह संकेत है, कि सरकार बड़ी कार्रवाई के लिए तैयार है। ईरान के आखिरी शाह के बेटे रेजा पहलवी ने प्रोटेस्ट का समर्थन किया है और देशव्यापी एक्शन का आह्वान किया है। हालांकि विपक्ष अभी भी बिखरा हुआ है और उसके पास कोई साफ रणनीति नहीं है।
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ट्रंप और खामेनेई में तकरार-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को बार-बार चेतावनी दी है, कि अगर सिक्योरिटी फोर्सेज ने प्रदर्शनकारियों को मारना शुरू किया, तो गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने ग्राउंड ट्रूप्स न भेजने की बात कही है, लेकिन मिलिट्री एक्शन की धमकी दी है। खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक बयान में अमेरिका पर समस्याएं भड़काने का आरोप लगाया और ट्रंप से कहा, कि वह “अपने देश की समस्याओं पर फोकस करें”। उन्होंने चेतावनी दी, कि इस्लामिक रिपब्लिक पीछे नहीं हटेगा।
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