Trump Iran Tariff: ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा, कि तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को अमेरिका के साथ किए जाने वाले किसी भी कारोबार पर 25 फीसदी टैरिफ देना होगा। यह ऐलान ऐसे समय पर आया है, जब ईरान के सभी 31 प्रांतों में 600 से ज्यादा विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अब तक कम से कम 646 लोगों की मौत हो चुकी है।
ईरान को ट्रंप पहले से ही धमकी दे रहे थे, कि अगर इस्लामिक रिपब्लिक ने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल किया, तो अमेरिका मिलिट्री एक्शन ले सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, कि यह एक रेड लाइन है, जिसे ईरान क्रॉस करना शुरू कर रहा है और इसकी वजह से वह और उनकी नेशनल सिक्योरिटी टीम बहुत मजबूत विकल्पों पर विचार कर रही है।
ट्रंप का ट्रुथ सोशल पोस्ट-
ट्रंप ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, कि तुरंत प्रभाव से इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ कारोबार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ किए जाने वाले किसी भी व्यापार पर 25 फीसदी टैरिफ देगा। यह आदेश फाइनल और निर्णायक है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने पत्रकारों से कहा कि एयरस्ट्राइक उन कई विकल्पों में शामिल है जिन पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, लेविट ने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रपति के लिए डिप्लोमेसी हमेशा पहला विकल्प होता है।
भारत पर पड़ेगा असर-
अब सवाल यह है, कि ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर अमेरिकी टैरिफ का भारत पर क्या असर होगा। जवाब साफ है, हां। ट्रंप के इस कदम से भारत पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा। हालांकि चीन को ईरान का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर माना जाता है, लेकिन इराक, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की और भारत भी तेहरान के प्रमुख व्यापारिक सहयोगी हैं। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से रिश्ते हैं और दोनों एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं।
तेहरान में भारतीय दूतावास के अनुसार, 2024-25 में भारत का ईरान को निर्यात 1.24 बिलियन अमेरिकी डॉलर और ईरान से आयात 0.44 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। कुल द्विपक्षीय व्यापार 1.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। भारत के प्रमुख निर्यात में बासमती चावल, चाय, चीनी, ताजे फल और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं, जबकि ईरान से आयात में सेब, पिस्ता, खजूर और कीवी शामिल हैं।
भारत के लिए दोहरी मार-
ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में ईरान को भारत के निर्यात में अनाज की सबसे बड़ी हिस्सेदारी 698.51 मिलियन डॉलर थी, जबकि तेहरान से नई दिल्ली के आयात में ऑर्गेनिक केमिकल्स की सबसे बड़ी हिस्सेदारी 512.92 मिलियन डॉलर थी। यह देखते हुए, कि अमेरिका ने पहले ही भारतीय सामानों पर रूसी तेल खरीद के कारण 50 फीसदी तक टैरिफ लगा दिया है, ईरान व्यापार पर अतिरिक्त शुल्क भारत के लिए और मुश्किलें पैदा करेगा।
नया टैरिफ भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए भी बाधा बनेगा, जो लंबे समय से फाइनलाइजेशन की प्रक्रिया में है। अमेरिकी राजदूत-नामित सर्जियो गोर ने सोमवार को भारत-अमेरिका साझेदारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा, कि दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार समझौते को पूरा करने में सक्रिय रूप से शामिल हैं। गोर ने कहा, कि भारत से ज्यादा जरूरी कोई साझेदार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम-
इस बीच, ट्रंप प्रशासन के सिर पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का डर मंडरा रहा है। कई छोटे व्यवसायों और अमेरिकी राज्यों के एक समूह द्वारा टैरिफ पॉलिसी को टॉप कोर्ट में चुनौती दी जा रही है। वे तर्क दे रहे हैं कि ट्रंप ने अतिरिक्त टैक्स लगाने में राष्ट्रपति के रूप में अपने अधिकार का उल्लंघन किया। अगर ट्रंप प्रशासन यह तर्क हार गया, तो उसे पहले से एकत्र किए गए अरबों डॉलर में से कुछ रिफंड करना पड़ सकता है। ट्रंप ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, कि अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट टैरिफ पॉलिसी पर उनके प्रशासन के खिलाफ फैसला सुनाता है, तो हम खत्म हो जाएंगे।
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ईरान में हालात गंभीर-
ईरान में हिंसक प्रदर्शन इस्लामिक रिपब्लिक की खराब अर्थव्यवस्था से शुरू हुए हैं। सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन नेटवर्क बंद कर दिए हैं। एक्टिविस्ट्स ने कहा कि चल रहे प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या कम से कम 646 है। अमेरिका स्थित HRANA ने कहा कि मृतकों में से 512 प्रदर्शनकारी और 132 सुरक्षा बल के सदस्य थे। इसके अलावा, पिछले दो हफ्तों में 10,700 से ज्यादा लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।
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