Iran Protests
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    Iran Protests: ईरान में बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक संकट के बीच देशव्यापी विरोध प्रदर्शन ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। शिराज, इस्फहान, केरमानशाह और तेहरान में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों के वीडियो सामने आ रहे हैं। इस पूरे आंदोलन के बीच एक बुजुर्ग महिला प्रदर्शनकारी का वीडियो वायरल हो गया है, जो इस्लामिक शासन के खिलाफ विद्रोह का प्रतीक बन गया है।

    खून से लथपथ चेहरे के साथ निकली सड़कों पर-

    पश्चिमी ईरान के लोरेस्तान प्रांत के बोरुजर्ड शहर में विरोध प्रदर्शन के दौरान यह घटना सामने आई। वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग महिला का चेहरा खून से लथपथ है, लेकिन उनके हौसले बुलंद हैं। वह मार्च करते हुए नारे लगा रही हैं और कह रही हैं, “मुझे डर नहीं है, मैं 47 साल से मर चुकी हूं।” यह बयान 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से बीते समय की ओर इशारा करता है, जब से ईरान में इस्लामिक शासन की स्थापना हुई थी।

    वीडियो में महिला के मुंह से खून बह रहा है, फिर भी वह बोरुजर्ड की सड़कों पर चलते हुए सरकार विरोधी नारे लगा रही हैं। ईरानी-अमेरिकी पत्रकार और एक्टिविस्ट मासिह अलीनेजाद ने इस क्लिप को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए लिखा, “यह उस महिला की आवाज है, जो इस्लामिक रिपब्लिक से तंग आ चुकी है। 47 साल पहले इस्लामिक रिपब्लिक ने हमारे अधिकार छीन लिए और पूरे देश को बंधक बना दिया। आज लोगों के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए वे उठ खड़े हुए हैं।”

    ‘तानाशाह को मौत’ के नारों से गूंज रहे शहर-

    द् इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, निडर प्रदर्शनकारियों ने भीड़भाड़ वाली सड़कों पर सुरक्षा बलों का सामना किया है। प्रदर्शनकारी पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंक रहे हैं और “तानाशाह को मौत” तथा “गर्वित अराकी, समर्थन करो, समर्थन करो” जैसे नारे लगा रहे हैं। पीपल्स मोजाहेदीन ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान द्वारा साझा किए गए फुटेज में भीड़ “खामेनेई को मौत” और “शर्म करो, शर्म करो” के नारे लगाती दिख रही है।

    ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के साथ इस्लामिक शासन की शुरुआत हुई थी, जिसमें पश्चिमी समर्थक शाह मोहम्मद रजा पहलवी को उखाड़ फेंका गया और अयातुल्लाह रुहुल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में शिया इस्लामिक थियोक्रेसी की स्थापना हुई। वर्तमान सुप्रीम लीडर सैयद अली होसैनी खामेनेई इसी विरासत के वाहक हैं।

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    आर्थिक संकट बना आंदोलन की जड़-

    ईरानी प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार की सुबह तक सड़कों पर मार्च किया और नारे लगाए, भले ही सरकार ने देश को इंटरनेट और अंतर्राष्ट्रीय टेलीफोन कॉल से काट दिया हो। प्रतिबंधों के कड़े होने और 12 दिन के युद्ध के बाद ईरान की रियाल मुद्रा दिसंबर में ध्वस्त हो गई, जो एक डॉलर के बदले 14 लाख रियाल तक पहुंच गई। इसके तुरंत बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। पिछले एक साल में ईरान की मुद्रा का मूल्य काफी गिर गया है, जिससे आयात की लागत बढ़ गई है और महंगाई बढ़कर 50 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है।

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    रजा पहलवी ने शुक्रवार रात 20:00 बजे स्थानीय समय पर विरोध प्रदर्शन जारी रखने का आह्वान किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा कि “लाखों ईरानियों ने आज रात अपनी आजादी की मांग की।” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी धमकी दोहराई है कि अगर सरकारी बल प्रदर्शनकारियों को मारते हैं तो वह ईरान पर “कड़ी चोट” करेंगे।

    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।