Taliban Smartphone Ban
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    Taliban Smartphone Ban: अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक ऐसा आदेश जारी किया है, जो सुनने में जितना अजीब लगता है, उतना ही गंभीर भी है। सरकारी अधिकारियों को अब दफ्तर में स्मार्टफोन ले जाने की इजाज़त नहीं है और अगर कोई इस नियम को तोड़ता है, तो उसकी सज़ा कठोर है, फोन को मौके पर ही तोड़ दिया जाता है। यह आदेश तालिबान की मिलिट्री कोर्ट के ज़रिए जारी किया गया है और यह वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर सामान्य स्टाफ तक सभी पर लागू होता है। सिर्फ सर्वोच्च नेता ही किसी को इससे छूट दे सकते हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो-

    गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, जो भी फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा जाता है, उसका फोन तोड़ा जाता है और साथ में “कानूनी और शरिया सज़ा” भी दी जाती है। ऑनलाइन वायरल हो रहे वीडियो में एक तालिबान अधिकारी आदेश पढ़ते हुए दिखता है, जबकि दूसरा व्यक्ति कैमरे के सामने फोन तोड़ता है।

    दस्तावेज़ लीक का डर-

    एक विश्लेषक के अनुसार इस सख्ती के पीछे कई कारण हैं। पहला, कुछ अधिकारी सरकारी दस्तावेज़ों की तस्वीरें खींचते और बैठकों की रिकॉर्डिंग करते थे, जिससे संवेदनशील जानकारी सर्वोच्च नेता की मंज़ूरी से पहले ही बाहर आ जाती थी। दूसरा कारण है उत्पादकता में गिरावट। विश्लेषक ने कहा, “लोग हमेशा अपने फोन पर लगे रहते हैं और काम नहीं करते। स्मार्टफोन का काम की जगह कोई स्थान नहीं होना चाहिए।”

    दो महीने से चल रहा था चुपचाप-

    हेरात में दो सरकारी कर्मचारियों ने बताया कि यह नियम औपचारिक आदेश से दो महीने पहले से ही लागू था। एक कर्मचारी ने कहा, “करीब दो महीने पहले उन्होंने कहा था, कि दफ्तर मोबाइल फोन मत लाओ।” जब उन्होंने और उनके साथियों ने इस निर्देश को नज़रअंदाज़ किया, तो उनके फोन ज़ब्त कर तोड़ दिए गए, जिसकी कीमत करीब 8,000 अफगानी यानी लगभग 95 पाउंड थी।

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    क्या यह बड़े प्रतिबंधों का संकेत है?

    इस आदेश का समय भी सवाल खड़े करता है। यह उस वक्त आया है, जब हेरात में महिलाओं की “अनुचित हिजाब” को लेकर गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन हुए थे। जिनमें तालिबान बलों ने कथित रूप से फायरिंग की और कम से कम दो लोगों की मौत हुई। विश्लेषक ने बताया, कि इस हिंसा के वीडियो सामने आने से तालिबान बेहद चिंतित हो गया। कुछ लोगों को डर है, कि यह स्मार्टफोन प्रतिबंध सिर्फ शुरुआत है और इसे आम जनता पर भी लागू किया जा सकता है, जैसा पहले महिलाओं, छात्रों और मेडिकल कर्मियों पर असमान रूप से प्रांतों में लागू हुए प्रतिबंधों में देखा गया था।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।