Russia Fuel Crisis: यूक्रेन के साथ जारी युद्ध अब रूस की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा व्यवस्था पर भी भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। देश में बढ़ते ईंधन संकट को लेकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद स्वीकार किया है, कि हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। रूस के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जबकि कुछ जगहों पर लोगों को अपनी जरूरत के अनुसार, ईंधन भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सरकार घरेलू आपूर्ति को मजबूत करने के लिए डीज़ल निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।
पेट्रोल पंपों पर कतारें-
सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में पुतिन ने कहा, कि देश के मोटर चालकों, उद्योगों और कृषि क्षेत्र को ईंधन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने माना, कि कई क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं और कई बार सही ग्रेड का पेट्रोल उपलब्ध नहीं होता। यह स्थिति आम लोगों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों के लिए भी परेशानी का कारण बन रही है।
पुतिन ने इस संकट के लिए यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे पर किए जा रहे ड्रोन हमलों को जिम्मेदार ठहराया। उनके अनुसार, इन हमलों से उत्पादन और सप्लाई चेन दोनों प्रभावित हुई हैं, जिससे देशभर में ईंधन वितरण की प्रक्रिया बाधित हुई है।
डीजल निर्यात पर रोक लगाने की तैयारी?
घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए रूस सरकार डीज़ल निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार कर रही है। हालांकि पुतिन ने चेतावनी दी, कि कोई भी ऐसा फैसला नहीं लिया जाना चाहिए. जिससे तेल उत्पादकों के सामने नई समस्याएं खड़ी हो जाएं।
दिलचस्प बात यह है, कि रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक और ऊर्जा मंत्रालय फिलहाल निर्यात प्रतिबंध के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। उनका मानना है, कि अन्य उपायों के ज़रिए भी बाजार को स्थिर किया जा सकता है और ऊर्जा क्षेत्र को नुकसान पहुंचाए बिना घरेलू आपूर्ति सुधारी जा सकती है।
कृषि क्षेत्र पर सबसे ज्यादा चिंता-
रूस सरकार के लिए इस समय कृषि क्षेत्र सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बन गया है। पुतिन ने कहा, कि अगर किसानों तक समय पर ईंधन नहीं पहुंचा तो इस साल की फसल प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कृषि उद्योगों के लिए तय ईंधन आपूर्ति कार्यक्रम हर हाल में बनाए रखें, क्योंकि इससे सीधे तौर पर खाद्यान्न उत्पादन जुड़ा हुआ है।
पिछले साल से कम हैं ईंधन भंडार-
पुतिन के अनुसार रूस के पास इस समय लगभग 17 लाख टन पेट्रोल का भंडार है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 4 प्रतिशत कम है। हालांकि सरकार ने इन भंडारों का उपयोग घरेलू बाजार को स्थिर रखने के लिए किया है, लेकिन उनका दावा है कि जुलाई से उत्पादन में सुधार देखने को मिल सकता है और ईंधन उत्पादन जून के स्तर से आगे निकल जाएगा।
यूक्रेन के हमलों से बढ़ी मुश्किलें
पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस के अंदर और रूस के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में स्थित तेल रिफाइनरियों, भंडारण केंद्रों और औद्योगिक ठिकानों पर ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। इन हमलों ने रूस की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पैदा कर दिया है। नतीजतन, मॉस्को को निर्यात से ज्यादा घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
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क्या भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर पड़ेगा?
रूस दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है, इसलिए वहां पैदा होने वाला कोई भी बड़ा ईंधन संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है। अगर रूस घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए डीज़ल और अन्य ईंधन के निर्यात पर प्रतिबंध लगाता है या निर्यात में कटौती करता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है और पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत का प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।
हालांकि फिलहाल भारतीय बाजार में तत्काल किसी बड़े झटके की आशंका नहीं है, लेकिन अगर रूस का संकट लंबा खिंचता है और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भविष्य में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
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